मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, बम धमाकों में बच्चों की मौत पर भारी बवाल, 5 जिलों में इंटरनेट बंद

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
23/04/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – भारत के राज्य मणिपुर में पिछले तीन साल से जारी सांप्रदायिक हिंसा एक बार फिर तेज हो गई है।

अप्रैल महीने में हुए एक बम धमाके से पूरे इलाके में भारी तनाव पैदा हो गया है।

अब लोग न्याय के लिए सड़कों पर उतर आए हैं और सुरक्षा बलों से भिड़ रहे हैं।

हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कई जिलों में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह से बंद कर दी गई हैं।

मणिपुर में फिर क्यों शुरू हुई हिंसा?

7 अप्रैल 2026 को बिष्णुपुर जिले के ट्रोंग्लाओबी अवांग लीकाई इलाके में एक घर पर संदिग्ध बम हमला हुआ।

धमाके में 5 साल के बच्चे और उसकी 6 महीने की छोटी बहन की मौत हो गई, जबकि उनकी मां घायल हो गईं।

इस घटना के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।

इस बीच सीआरपीएफ की फायरिंग में तीन और लोगों की जान चली गई, जिससे पूरे राज्य में डर और तनाव का माहौल बन गया है।

स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए?

हिंसा को रोकने और अफवाहों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में इंटरनेट बंद कर दिया है।

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कहा कि हमले के पीछे वे लोग हैं जो शांति भंग करना चाहते हैं।

बता दें कि 4 फरवरी 2026 को मणिपुर से राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया था और नई सरकार ने कार्यभार संभाला था।

मार्च में एक शांति बैठक भी आयोजित की गई थी, लेकिन हाल के हमलों ने उन प्रयासों को कमजोर कर दिया है।

इस जातीय संघर्ष में कौन शामिल है और कितना नुकसान हुआ?

मैतेई समुदाय:

यह बहुसंख्यक हिंदू समुदाय है जो मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहता है।

कुकी-ज़ो समुदाय:

यह एक ईसाई समुदाय है जो पहाड़ी इलाकों में रहता है

हताहत:

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2023 से अब तक 258 लोग मारे गए हैं और लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं।

सुरक्षा की मांग :

डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन ने आपसी मेल-मिलाप और सुरक्षा के लिए बफर जोन बनाये रखने की अपील की।

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