ममता बनर्जी के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए आयोग का गठन

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
15/07/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – पश्चिम बंगाल सरकार ने ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल के दौरान कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए एक आयोग का गठन किया है।

इस आयोग की अध्यक्षता कलकत्ता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विश्वजीत बसु करेंगे।

राज्य सचिवालय ने 10 जुलाई को एक बयान जारी किया।

बयान के मुताबिक, आयोग 2011 से इस साल मई तक भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करेगा।

इसमें शिक्षा, भोजन और आपूर्ति, राहत और आपदा प्रबंधन, नगर पालिकाओं और पंचायतों के अधिकार क्षेत्र, आवास और मत्स्य पालन शामिल हैं।

इस बात की जानकारी गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने दी है।

उनके मुताबिक आयोग अलग-अलग क्षेत्रों में लगे सभी आरोपों की जांच करेगा। इनमें रिश्वतखोरी, अम्फान चक्रवात राहत में भ्रष्टाचार, 100 दिन की रोजगार योजना की विफलता शामिल है।

इसी तरह, सत्ता के दुरुपयोग, मध्याह्न भोजन में गड़बड़ी और सरकारी नौकरियों की नियुक्ति में भ्रष्टाचार की भी जांच की जाएगी।

साथ ही अवैध गिरफ्तारियों और झूठे मुकदमों की भी जांच की जाएगी।
अवैध निर्माण में सरकार की भूमिका की भी जांच होगी।

सहायक पुलिस महानिदेशक रैंक के आईपीएस अधिकारी केके जयारमन आयोग के सदस्य सचिव होंगे।

उनके अलावा आईएएस और राज्य प्रशासनिक सेवा के एक-एक अधिकारी भी आयोग में शामिल होंगे।

एक अधिकारी ने आयोग के अधिकार के बारे में बताया। किसी मामले की जांच के दौरान आयोग किसी भी व्यक्ति को बयान के लिए बुला सकता है।

यह पुलिस को एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश भी कर सकता है।

लेकिन यह आयोग भ्रष्टाचार के उन मामलों की जांच नहीं कर सकता जिनकी जांच केंद्रीय एजेंसियां ​​कर रही हैं। आयोग समय-समय पर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।

विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपना बयान दिया।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर आगे बढ़ेगी।
उन्होंने विधानसभा में भी यह बात दोहराई।

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