मोबाइल की लत का दुखद मामला: भारत में 3 बहनों ने नौवीं मंज़िल से छलांग लगाई

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
04/02/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – मोबाइल गेम की लत कितनी खतरनाक हो सकती है, इसका एक उदाहरण मंगलवार रात भारत के उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हुई एक घटना से दिखा।

एक ही परिवार की तीन बहनें, जिन्हें लंबे समय से मोबाइल गेम की लत थी, अपने घर की बालकनी से कूद गईं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

पुलिस ने बताया कि टीला मोड़ थाना इलाके में भारत सिटी सोसाइटी के B-1 टावर के फ्लैट नंबर 907 में रहने वाली 16 साल की निशिका, 14 साल की प्राची और 12 साल की पाखी ने नौवीं मंज़िल से छलांग लगा दी और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

यह घटना मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे हुई। इस घटना के बाद सोसाइटी और आसपास के इलाके में मातम है।

ऑनलाइन गेम की लत और परिवार में तनाव

पुलिस जांच में पता चला है कि तीनों बहनें मोबाइल गेम की बहुत ज़्यादा आदी हैं। घरवालों के मुताबिक, वे ऑनलाइन टास्क वाला ‘कोरियन लवर गेम’ खेलती थीं।

कोरोना महामारी के बाद से, वे अपने मोबाइल फ़ोन का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल कर रही थीं। तीनों बहनें नहाने, खाने, स्कूल जाने और सोने जैसे रोज़ के काम एक साथ करती थीं।

उनके माता-पिता उनकी इस आदत से परेशान थे। कभी-कभी वे उन्हें याद दिलाते और डांटते भी थे। पुलिस को शुरू में शक है कि मोबाइल गेम की लत और घरवालों के दबाव की वजह से उन्होंने घर से छलांग लगा दी।

सुसाइड नोट मिला

पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है। उससे भी यह कन्फर्म होता है कि उन्हें मोबाइल गेम की लत थी।

सुत्र के मुताबिक, सुसाइड नोट में लिखा है – ‘मम्मी-पापा, सॉरी। जिस गेम को आप हमसे छुड़वाना चाहते थे, अब आपको पता चलेगा कि हमें वह गेम कितना पसंद था।’

पुलिस का कहना है कि यह नोट तीनों बहनों की मेंटल हालत और उनके अंदर के झगड़े को दिखाता है।

हालांकि, पुलिस ने कहा कि सभी तरफ से पूरी जांच चल रही है, सिर्फ इसी आधार पर कोई नतीजा नहीं निकाला जा सकता।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस की एक टीम रात में ही मौके पर पहुंच गई।

तीनों बहनों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। परिवार वाले गहरे दुख में हैं, वहीं सोसायटी के लोग भी इस घटना से मानसिक रूप से प्रभावित हुए हैं।

इस घटना ने नाबालिगों में मोबाइल और ऑनलाइन गेम की बढ़ती लत, माता-पिता और बच्चों के बीच बातचीत और बच्चों की मानसिक सेहत जैसे गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस घटना ने एक बार फिर टेक्नोलॉजी, निगरानी और संवेदनशील पेरेंटिंग के बीच संतुलन की ज़रूरत पर बहस को सामने ला दिया है।

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