उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
17/02/2026
काठमाण्डौ,नेपाल – भारत बदल गया है. आज भारत हथियारों का केवल खरीददार नहीं बल्कि देसी वैज्ञानिकों द्वारा डेवलप किए गए हथियारों का निर्यातक भी बन गया है।
ये निर्यात अब केवल तीसरी दुनिया के देशों तक ही सीमित नहीं है।
बल्कि अब डेवलप देश भी भारत के हथियारों के मुरीद हो रहे हैं।
इसी क्रम में फ्रांस भी भारत के एक साख सिस्टम को खरीदना चाहता है. इसके लिए उसकी एक हाई पावर कमेटी भारत का दौरा भी कर चुकी है।
दरअसल, भारत फ्रांस से 4.5+ पीढ़ी के 114 राफेल विमानों की डील करने की ओर बढ़ रहा है।
यह करीब 3.25 लाख करोड़ की डील है. भारत के हथियार खरीद इतिहास की यह संभवतः सबसे बड़ी डील है।
बीते दिनों रक्षा मंत्रालय के रक्षा खरीद परिषद ने इस डील को मंजूरी दे दी. अब सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी इस पर अपनी मुहर लगाएगी।
फिर फ्रांस के साथ इस डील के तकनीकी पहलुओं और कीमत को लेकर बातचीत होगी।
माना जा रहा है एक्सपर्ट कह रहे हैं कि राफेल डील के बाद फ्रांस भी चाहता है कि वह भारत के साथ सैन्य रिश्तों को नई ऊंचाई पर पहुंचाए।
इसके लिए वह उस भारतीय हथियार को खरीदना चाहता है, जो हर एक मामले में दुनिया का एक बेहतरीन सिस्टम है।
पिनाक रॉकेट सिस्टम
दरअसल, हम बात कर रहे हैं पिनाका रॉकेट सिस्टम की. यह भारत का एक बेहतरीन रॉकेट सिस्टम है, जो अपनी श्रेणी में दुनिया के किसी भी सिस्टम को कड़ी टक्कर देता है।
इस सिस्टम का सीधा मुकाबला अमेरिकी रॉकेट सिस्टम हिमर्स (HIMARS) और रूसी टोर्नाडो-एस (Tornado-S) से है।
रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस और भारत के बीच पिनाका रॉकेट सिस्टम के लिए उच्च स्तरीय लेवल पर बातचीत चल रही है।
पिनाका एक मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है. अगर यह डील हो जाती है तो भारत के हथियार निर्यात के लिए एक बहुत बड़ी बात होगी. क्योंकि फ्रांस एक विकसित देश है।
ग्लोबल आर्म्स मार्केट का वह एक बहुत बड़ा खिलाड़ी है. वह नाटो का सदस्य है. वह एक सुपर पावर है. ऐसे में अगर वह भारतीय सिस्टम पर भरोसा करता है तो यह भारत के हथियारों की विश्वसनीयता के लिए बहुत बड़ी बात होगी।
कहां तक पहुंची बातचीत
पिनाका रॉकेट सिस्टम के लिए बीते दिनों फ्रांस के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत का दौरा किया।
इस टीम ने इस सिस्टम के परफॉर्मेंस, लॉन्चर और एम्यूनिशन का मूल्यांकन किया।
दरअसल, फ्रांस अपनी आर्मी के अपने पुराने पड़ चुके एम270 लान्स रोक्यूट्स यूनिटेयर सिस्टम को अपग्रेड करना चाह है।
फ्रांस की आर्मी इसी रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल करती है. वैसे फ्रांस अपना रॉकेट सिस्टम फ्रैप लॉन्ग पोर्टी टेरेस्ट्री सिस्टम डेवलप भी कर रहा है।
लेकिन, उसमें अभी काफी समय लगने वाला है. ऐसे में तब तक सेना की जरूरत को पूरा करने के लिए वह पिनाका खरीदना चाहता है।
पिछले दिनों पिनाक रॉकेट सिस्टम के एडवांस वर्जन का परीक्षण किया गया. फोटो- पीटीआई
पिनाका ही क्यों?
जबकि क्वालिटी में यह अमेरिकी सिस्टम हिमर्स को टक्कर देता है. यह बीते करीब तीन दशक से भारतीय सेना में है और लगातार अपग्रेड होता रहा है. इसने कारगिल युद्ध में अपनी क्षमता दिखाई थी।
अर्मेनिया पहले ही भारत से यह सिस्टम खरीद चुका है. इसका मौजूदा वर्जन 75 से 90 किमी की रेंज का है. भारत ने पिनाका एमके3 डेवलप कर लिया है।
इस सिस्टम का रेंज 120 से 130 किमी है. पिनाका एमके4 पर भी काम चल रहा है, जिसकी रेंज 300 किमी तक रहने की उम्मीद है. जहां अमेरिकी रॉकेट सिस्टम से तुलना की बात है तो एक पिनाका सिस्टम की कीमत मात्र 2.3 करोड़ है जबकि अमेरिकी सिस्टम की कीमत करीब 19.5 करोड़ है. यानी कीमतों में करीब आठ गुना का अंतर है।
पिनाका की खासियतें
पिनाका की सबसे बड़ी खासियत इसकी फायर करने की स्पीड है।
यह पहाड़ी और बेहद ऊंचाई वाले इलाकों के लिए बेहतरीन सिस्टम है।
पिनाका जहां वार करता है वहां तबाही ला देता है।
इसका एक सिंगल लॉन्चर मजह 44 सेकेंड में 12 रॉकेट दाग सकता है।
इसकी एक पूरी बैटरी में छह लॉन्चर होते हैं और एक मिनट में ये 72 रॉकेट दागते हैं।
यह एक वर्ग किमी के इलाके को पूरी तरह तबाह कर देता है।
इमसें मल्टी डायरेक्श फाइरिंग कैपिसिटी है।
इसका हर एक लॉन्चर एक ही समय में अलग-अलग डायरेक्शन में रॉकेट दाग सकता है।
इस तहर यह एक ही पॉजिशन से हर दिशा में लक्ष्य को भेद सकता है।
यह मैदान, रेगिस्तान और पहाड़ हर जगह एक जैसा प्रभावी है।
पिनाका शूट एंड स्कट कैपिसिटी का रॉकेट लॉन्चर है।
यानी यह फायर करने के बाद तेजी से अपनी जगह बदल लेता है।
इससे दुश्मन के लिए इस रॉकेट लॉन्चर को टार्गेट करना लगभग असंभव है।
इसमें चार अलग-अलग ऑपरेशन मोड हैं- ऑटोनोमस, स्टैंड अलोन, रिमोट और मैनुअल।
कीमत बनी सबसे बड़ी ताकत
पिनाका की सबसे बड़ी ताकतइसकी किफायती कीमत है. यह पश्चिम रॉकेट सिस्टम की तुलना में काफी कम है. एक पिनाका सिस्टम की कीमत मात्र 2.3 करोड़ रुपये है, जबकि इसके अमेरिकी कंप्टीटर की कीमत 19.5 करोड़ रुपये है. डीआरडीओ ने इसको पूरी तरह देसी बनाया है. इसके किसी भी कल-पुर्जे के लिए विदेश पर निर्भरता नहीं है।
क्या पिनाका बेस्ट रॉकेट सिस्टम है?
मिलिट्री उपकरणों में किसी सिस्टम को बेस्ट नहीं कहा जा सकता. यह चीज आपकी जरूरत और क्षमता से तय होती है।
जहां तक पिनाका की बात है तो कीमत, फायर की क्षमता और हर एक युद्ध क्षेत्र में इसके कारगर होने की क्षमता इसको अपनी श्रेणी में बेस्ट बनाता है।
मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम की ग्लोबल रैकिंग में यह हमेशा से टॉप-5 में शामिल रहा है. इसकी रेंज बहुत अधिक नहीं है। अमेरिकी सिस्टम की रेंज 300 से 499 किमी है जबकि रूसी सिस्टम की रेंज 120-200 किमी है. लेकिन पनाका की रैपिड फायर क्षमता अमेरिकी सिस्टम पर भारी पड़ती है।
यह 44 सेकेंड में 12 रॉकेट फायर करता है जबकि अमेरिकी हिमर्स 45 सेकेंड में छह रॉकेट दागता है. यह बैटर प्रूवेन रॉकेट सिस्टम है।
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अपने फायर पावर के दम पर अमेरिकी रॉकेट सिस्टम से करीब-करीब आधे समय में एक वर्ग किमी के क्षेत्र को तबाह कर सकता है।

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