भारतीय अंतरिक्ष नवाचार को एक नई पहचान देनाएक किसान का बेटा जो 6 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाता था, आज नासा कंपनी में रॉकेट वैज्ञानिक बन गया

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
21/05/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – डॉ. आनंद मेगालिंगम की कहानी संघर्ष, जुनून और बड़े सपनों की मिसाल है, जो लाखों युवाओं को प्रेरणा दे रही है।

तमिलनाडु के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे आनंद मेगालिंगम के पिता एक ट्रैक्टर ड्राइवर थे।

उनका बचपन आर्थिक तंगी के बीच बीता और पढ़ाई के लिए उन्हें हर दिन करीब 6 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता था।

शुरुआत में उन्होंने कंप्यूटर साइंस में दाखिला लिया, लेकिन उस क्षेत्र से जुड़ाव महसूस नहीं कर सके और कॉलेज बीच में ही छोड़ दिया।

जबकि कई लोगों ने हार मान ली होगी, आनंद ने खुद को वापस उठाया और एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में एक नई शुरुआत की।
कड़ी मेहनत और लगन से वह गोल्ड मेडलिस्ट बने।

इसके बाद उन्होंने स्पेस जोन इंडिया की स्थापना की, जो आज भारत की सबसे तेजी से बढ़ती निजी स्पेस-टेक क्षेत्र की मशहूर कंपनियों में गिनी जाती है।

उनकी कंपनी ने RHUMI-H जैसे पुन: प्रयोज्य हाइब्रिड रॉकेट मिशन पर काम किया, जिसने भारतीय अंतरिक्ष नवाचार को एक नई पहचान दी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक समय ऐसा भी था जब उन्हें अमेरिका का वीजा नहीं मिलता था।

लेकिन अपने सपनों को छोड़ने के बजाय, उन्होंने भारत में काम करना जारी रखा। बाद में वही आनंद मेगालिंगम अमेरिकी विदेश विभाग के प्रतिष्ठित नेतृत्व कार्यक्रम के लिए चुने गए और नासा से जुड़े प्रशिक्षण प्रदर्शन तक पहुंचे।

आज उनकी कहानी सिर्फ रॉकेट साइंस नहीं है, बल्कि आस्था की एक मिसाल है जो बताती है कि छोटे से गांव के सपने भी आसमान छू सकते हैं।

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