भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के जिक्र को ‘अनुचित’ बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
29/05/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि इस मामले पर भारत की स्थिति स्पष्ट है और संबंधित पक्ष इससे अच्छी तरह वाकिफ हैं।

प्रवक्ता जयसवाल ने कहा, ”केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे।”

किसी भी दूसरे देश को इस मामले पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।

भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा परियोजना का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह “अवैध” और “भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन” है।

इसके अलावा विदेश मंत्रालय ने चीन और पाकिस्तान के बीच “सीमा पार जल संसाधन सहयोग” के मुद्दे पर भी सवाल उठाए हैं।

प्रवक्ता जयसवाल ने कहा, “हमने चीन और पाकिस्तान के बीच तथाकथित सीमा पार जल संसाधन सहयोग का संदर्भ भी देखा है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने पाकिस्तान और चीन के बीच 1963 में हुए तथाकथित सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है क्योंकि इन दोनों देशों के बीच कोई साझा सीमा नहीं है।

हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने मंगलवार को एक संयुक्त बयान जारी किया था।
उस बयान में जम्मू-कश्मीर के मामले का जिक्र किया गया था।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया, ”पाकिस्तान ने चीन को जम्मू-कश्मीर के ताजा हालात से अवगत कराया, जिसमें चीन ने कहा कि यह विवाद पुराना है और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर, सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार शांतिपूर्ण ढंग से हल किया जाना चाहिए।”

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