अंकों की हेराफेरी कर नौकरी पाने का आरोप

 

  • शिकायतकर्ता ने डाक विभाग पर लगाया मामले को दबाने का आरोप

गोरखपुर। डाक विभाग में वर्ष 2005 से कार्यरत एक ग्रामीण डाक सेवक की नियुक्ति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। महराजगंज निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिकायतकर्ता इनामुल्लाह सिद्दीकी ने आरोप लगाया है कि संबंधित कर्मचारी ने कथित रूप से शैक्षिक अभिलेखों में हेरफेर कर नौकरी प्राप्त की, लेकिन बार-बार शिकायतों और दस्तावेजी साक्ष्यों के बावजूद विभागीय अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय उसे क्लीन चिट दे दी।
शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने डाक विभाग के पीजी पोर्टल पर शिकायत संख्या DPOST/E/2025/0053051 तथा अपील संख्या DPOST/E/A/25/0006681 दर्ज कर आरोप लगाया था कि ग्रामीण डाक सेवक श्रीनिवास यादव की नियुक्ति में प्रयुक्त शैक्षिक प्रमाणपत्रों में अंक संबंधी गंभीर विसंगतियां हैं। शिकायत में दावा किया गया था कि मूल अंकपत्र और नियुक्ति में प्रयुक्त अभिलेखों के अंकों में अंतर है, जिसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

आरटीआई में सामने आए नए तथ्य

शिकायतकर्ता का कहना है कि सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों तथा शिक्षा संस्थान से प्राप्त अभिलेखों में संबंधित अभ्यर्थी के वास्तविक प्राप्तांक अलग पाए गए हैं। हाल ही में श्री नारंग संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, घुघली, महराजगंज द्वारा जारी पत्र में वर्ष 2003 की परीक्षा में संबंधित छात्र के कुल 500 में 304 अंक प्राप्त करने का उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि यदि विद्यालय के अभिलेखों में अंक 304 दर्ज हैं तो नियुक्ति के समय प्रस्तुत दस्तावेजों का पुनः परीक्षण आवश्यक है। उनका कहना है कि विभाग ने इस महत्वपूर्ण तथ्य की गहन जांच नहीं कराई।

बिना स्थलीय जांच के दे दी क्लीन चिट”

इनामुल्लाह सिद्दीकी का आरोप है कि गोरखपुर मंडल के अधिकारियों ने मामले की जांच बिना स्थलीय सत्यापन के कर दी। उन्होंने कहा कि न तो विद्यालय जाकर अभिलेखों की जांच की गई और न ही शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए नए दस्तावेजों का परीक्षण किया गया।
शिकायतकर्ता ने कहा कि यदि विभाग निष्पक्ष होता तो संबंधित विद्यालय, उत्तर प्रदेश संस्कृत शिक्षा परिषद और नियुक्ति अभिलेखों का तुलनात्मक सत्यापन कराया जाता। इसके बजाय पुराने अभिलेखों का हवाला देकर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया।

विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल

मामले में शिकायतकर्ता ने केवल संबंधित कर्मचारी ही नहीं बल्कि जांच करने वाले अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बार-बार शिकायत और दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध कराने के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे यह संदेह पैदा होता है कि कहीं न कहीं मामले को दबाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच गोरखपुर मंडल से हटाकर किसी स्वतंत्र एजेंसी या उच्च स्तरीय समिति से कराई जाए ताकि सत्य सामने आ सके।

20 वर्षों से नौकरी,अब निष्पक्ष जांच की मांग

शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि गलत दस्तावेजों के आधार पर नौकरी प्राप्त की गई थी, तो यह न केवल नियुक्ति प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न होगा बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला भी माना जाएगा। उन्होंने संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने, सेवा समाप्ति और नियमानुसार अन्य कार्रवाई की मांग की है।

मुख्य पोस्टमास्टर जनरल को भेजी विस्तृत शिकायत

शिकायतकर्ता ने अब मुख्य पोस्टमास्टर जनरल, उत्तर प्रदेश परिमंडल, लखनऊ को विस्तृत शिकायत भेजकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, नियुक्ति अभिलेखों का पुनः सत्यापन कराने तथा शिकायतों का निस्तारण करने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है।
मामला अब मुख्य पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय तक पहुंच गया है। यदि उच्चस्तरीय जांच के आदेश होते हैं तो डाक विभाग की इस नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

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