मनरेगा में फर्जी हाजिरी का खेल? शपथ पत्र ने खोली करोड़ों की अनियमितताओं की परतें

गोरखपुर/खजनी । खजनी विकास खंड की ग्राम पंचायत मझरिया में मनरेगा कार्यों को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्राम निवासी पवन सिंह द्वारा जिलाधिकारी गोरखपुर को दिए गए शपथ पत्र ने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। शिकायत में फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी धन के दुरुपयोग, विकास कार्यों में अनियमितता और जांच न होने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शपथ पत्र के अनुसार मनरेगा के तहत संचालित कार्यों में कई मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति के बिना ही ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कर भुगतान किए जाने का दावा किया गया है। आरोप है कि एनएमएमएस एप और अन्य तकनीकी प्रणालियों का दुरुपयोग कर ऐसे लोगों के नाम पर भी उपस्थिति दर्ज की गई, जिन्होंने कार्यस्थल पर कोई काम नहीं किया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस कथित फर्जीवाड़े के माध्यम से लगभग 10 लाख रुपये या उससे अधिक की सरकारी धनराशि का भुगतान किया गया हो सकता है।

पुरानी शिकायतों पर भी नहीं हुई कार्रवाई

शपथ पत्र में उल्लेख है कि इस संबंध में 16 सितंबर 2025 को खंड विकास अधिकारी खजनी को लिखित शिकायत देकर जांच की मांग की गई थी। शिकायत में वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान ग्राम पंचायत में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों में वित्तीय एवं तकनीकी अनियमितताओं की ओर ध्यान आकर्षित कराया गया था।

1.10 करोड़ रुपये के विकास कार्यों पर सवाल

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत में नाली, सीसी रोड, इंटरलॉकिंग तथा अन्य विकास कार्यों पर लगभग 1.10 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन कई कार्यों की गुणवत्ता, माप पुस्तिका, भुगतान प्रक्रिया और कार्य निष्पादन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे अनियमितताओं की आशंका और गहरी हो गई है।

दस्तावेजी जांच की मांग

शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मनरेगा के मास्टर रोल, एनएमएमएस उपस्थिति रिकॉर्ड, जियो-टैग फोटो, भुगतान विवरण, बैंक खातों, मापन पुस्तिका (एमबी) तथा अन्य तकनीकी अभिलेखों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराई जाए। उनका दावा है कि रिकॉर्ड की जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा कि भुगतान किन लोगों के नाम पर हुआ और कथित अनियमितताओं में किन अधिकारियों, कर्मचारियों अथवा अन्य व्यक्तियों की भूमिका रही।
इस संबंध मे ज़ब बीडीओ खजानी से बात की गई थी तों उन्होंने कहाँ की बिना जाँच एवं सत्यापन के कोई पेमेंट नहीँ होता हैँ।
पर सबकी नजर अब जाँच पर टिकी जाँच होने के उपरांत दूध मे कितना पानी हैँ मिला ओ होगा सबके सामने।

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी
निगाहें

मामला सामने आने के बाद अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की ओर हैं। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाती है और शिकायत सही पाई जाती है, तो यह मनरेगा योजनाओं में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा साबित हो सकता है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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