लगातार तीन बार विधायक बन जनसेवा की लिखी नई इबारत, हजारों नम आंखों ने दी अंतिम विदाई
महराजगंज (आनन्द कुमार मिश्र)।बलिया जनपद की राजनीति के प्रभावशाली स्तंभ एवं रसड़ा विधानसभा क्षेत्र 358 से बहुजन समाज पार्टी के लगातार तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह के निधन से पूरे पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई है। जनसेवा, संघर्ष, सादगी और सामाजिक सरोकारों के लिए पहचान रखने वाले उमाशंकर सिंह को क्षेत्र की जनता “गरीबों का मसीहा” कहकर संबोधित करती थी। उनके निधन की खबर मिलते ही समर्थकों, शुभचिंतकों और आमजन में गहरा दुख व्याप्त हो गया। रसड़ा तहसील के नगरा ब्लॉक अंतर्गत खनवर-नवादा गांव के मूल निवासी उमाशंकर सिंह सेवानिवृत्त सैनिक स्वर्गीय घुरहू सिंह के ज्येष्ठ पुत्र थे। स्नातक तक शिक्षित उमाशंकर सिंह ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की और अपने संघर्ष, नेतृत्व क्षमता तथा जनसंपर्क के बल पर प्रदेश की राजनीति में एक अलग पहचान बनाई। छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर, तीन बार लगातार बने विधायक उमाशंकर सिंह ने सतीश चंद्र महाविद्यालय, बलिया के छात्रसंघ महामंत्री के रूप में छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद वर्ष 2002-03 में जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित होकर जनप्रतिनिधित्व की शुरुआत की। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी के रूप में पहली बार चुनाव मैदान में उतरते हुए उन्होंने लगभग 84 हजार मत प्राप्त कर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सनातन पाण्डेय को 52,825 मतों के ऐतिहासिक अंतर से पराजित किया। इसके बाद वर्ष 2017 में उन्होंने लगभग 92,272 मत हासिल कर भाजपा प्रत्याशी एवं पूर्व विधायक राम इकबाल सिंह को 33,885 मतों से हराकर लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचने का गौरव प्राप्त किया। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा-सुभासपा गठबंधन की कड़ी चुनौती के बावजूद उन्होंने सुभासपा प्रत्याशी महेंद्र चौहान को पांच हजार से अधिक मतों से पराजित कर लगातार तीसरी बार विधायक बनने का रिकॉर्ड कायम किया। 551 से अधिक निर्धन कन्याओं का कराया सामूहिक विवाह उमाशंकर सिंह केवल एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि समाजसेवा के क्षेत्र में भी अग्रणी रहे। उन्होंने अपने जीवनकाल में 551 से अधिक निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह कराकर सामाजिक सेवा की ऐसी मिसाल कायम की, जिसकी पूरे प्रदेश में सराहना हुई। गरीब, असहाय और जरूरतमंद परिवारों की हर संभव सहायता करना उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य था। यही कारण रहा कि जनता उन्हें स्नेहपूर्वक “गरीबों का मसीहा” कहती थी। निर्माण कार्यों से भी रहा गहरा जुड़ाव राजनीति में सक्रिय होने से पहले उमाशंकर सिंह “छात्र शक्ति इंफा कंस्ट्रक्शन” के माध्यम से सड़क निर्माण सहित विभिन्न विकास कार्यों से जुड़े रहे। विधायक बनने के बाद इस कार्य का संचालन उनके अनुज रमेश सिंह, पत्नी पुष्पा सिंह तथा पुत्र युकेश सिंह द्वारा किया जाता रहा। अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब। उनका पार्थिव शरीर गुरुग्राम से लखनऊ स्थित आवास लाया गया, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बसपा सुप्रीमो मायावती सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों एवं हजारों शुभचिंतकों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव खनवर (बलिया) ले जाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। हजारों नम आंखों ने अपने प्रिय जननेता को अंतिम विदाई दी। पूरे राजकीय सम्मान और भारी जनसमूह की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। पूर्वांचल की राजनीति ने खोया जनसेवा का एक मजबूत स्तंभ उमाशंकर सिंह का निधन केवल बलिया ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनका संघर्षपूर्ण जीवन, जनहित के प्रति समर्पण और गरीबों के लिए किए गए कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे। क्षेत्र की जनता उन्हें एक ऐसे जननेता के रूप में हमेशा याद रखेगी, जिन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाकर लोगों के दिलों में स्थायी स्थान बनाया।

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