सरस्वती शिशु मंदिर में 80वां स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से हुआ संपन्न: राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

 

 

आजादी केवल उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का अखंड संकल्प है” विनोद सिंह राठौर (प्रधानाचार्य)

गोरखपुर, 15 अगस्त 2026:** स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर (10+2) रेलविहार, राप्तीनगर, गोरखपुर के प्रांगण में 80वां स्वतंत्रता दिवस अत्यंत हर्षोल्लास, गरिमा और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाया गया। संपूर्ण विद्यालय परिसर तिरंगे के रंगों में रंगा नजर आया और भारत माता की जयकारों से वातावरण गूंज उठा।

कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण, राष्ट्रगान और अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती एवं भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन व दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

समारोह की शुरुआत में विद्यालय के यशस्वी प्रधानाचार्य  विनोद सिंह राठौर  ने मंचासीन मुख्य अतिथियों, प्रबंध समिति के सम्मानित पदाधिकारियों और अभिभावकों का परिचय कराया।

अपने ओजस्वी उद्बोधन में प्रधानाचार्य  ने ‘स्वतंत्रता की पुकार’ का आह्वान करते हुए कहा, “15 अगस्त 1947 को हमें राजनैतिक स्वतंत्रता तो मिल गई, परंतु सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से ‘आजादी अभी अधूरी है’। जब तक देश से अशिक्षा, कुरीतियाँ और पराधीन सोच पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा। विद्या भारती के इस पावन प्रांगण से हम ऐसे देशभक्त और स्वाभिमानी नागरिकों का निर्माण कर रहे हैं जो अखंड भारत और आत्मनिर्भर राष्ट्र के सपने को साकार करेंगे।”

समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के इंस्पेक्टर  दीपक मंडल जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा केवल तीन रंगों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह हमारे असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान का प्रतीक है। हमें सदैव अपने तिरंगे की आन-बान-शान की रक्षा करनी चाहिए।”

उन्होंने विद्यार्थियों में देशप्रेम जगाते हुए कहा, “देश सेवा के लिए किसी बड़े पद या वर्दी की अनिवार्यता नहीं होती; आप अपने अच्छे आचरण, सामाजिक उत्तरदायित्व और भारतीय संस्कारों के माध्यम से भी एक सच्चे नागरिक बनकर राष्ट्र की सेवा कर सकते हैं।”

कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि प्रो. अदिति सिंह  ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा, “प्यारे बच्चों! आप जिस संस्था से विद्या ग्रहण कर रहे हैं, यह आपको ज्ञान के साथ-साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने का कार्य करती है।”

विकसित भारत के संकल्प को दोहराते हुए उन्होंने नशे की आधुनिक परिभाषा समझाई, “जिस आदत को आप छोड़ न पाएं, वही नशा है और आज के दौर में मोबाइल फोन का अत्यधिक प्रयोग युवाओं के लिए सबसे बड़ा नशा बन चुका है। हमें इस डिजिटल लत से मुक्त होकर राष्ट्र निर्माण में अपनी ऊर्जा लगानी होगी। बच्चे ही इन राष्ट्रीय पर्वों के सच्चे उत्साह और प्राण हैं।”

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत सुप्रसिद्ध गीत “नन्हा मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ” से हुई, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।

इसके उपरांत वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित एक अत्यंत ओजस्वी और रोमांचक नाटक का मंचन किया गया। नाटक के दौरान जब वीरांगना का संवाद गूँजा— “झाँसी की ओर देखेंगी जो आँखें, वो आँखें निकाल ली जाएंगी…” — तो पूरे सभागार में रोमांच और देशभक्ति का नया संचार हो गया।

हिंदी भाषण के अंतर्गत कक्षा एकादश के भैया कृष्णा नायर ने ‘है प्रीत जहाँ की रीत सदा…’ के भावों को समेटे हुए तथा बहन आकांक्षा ने स्वाधीनता सेनानियों के योगदान पर अत्यंत प्रखर एवं प्रभावशाली विचार रखे।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे विद्यालय के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर  ने कहा, “यह दिन अमर बलिदानियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का है। आज हम जिस स्वतंत्र वातावरण में सांस ले रहे हैं, वह अनगिनत वीरों के बलिदान का परिणाम है।”

उन्होंने अत्यंत सरल शब्दों में 15 अगस्त (ध्वजारोहण – Flag Hoisting) और 26 जनवरी (झंडा फहराना – Flag Unfurling) के तकनीकी व ऐतिहासिक अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के नव-निर्माण और हर अच्छे कार्य की शुरुआत हमेशा विद्यालयों से ही होती है।

विद्यालय की उप प्रधानाचार्या  रुक्मिणी उपाध्याय  ने भैया-बहनों को संबोधित करते हुए कहा कि अनुशासन, राष्ट्रनिष्ठा और गुरुजनों का आदर ही सच्ची देशसेवा की पहली सीढ़ी है।

कार्यक्रम का अत्यंत गरिमामयी, अनुशासित और मंच-सज्जित संचालन विद्यालय के वरिष्ठ आचार्य  प्रेम सागर तिवारी  आचार्या दीपिका  तथा कक्षा 12वीं की मेधावी छात्रा बहन जिज्ञासा सत्संगी व बहन परी पाण्डेय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

समारोह के अंत में विद्यालय के कोषाध्यक्ष  अजय पाण्डेय ने उपस्थित अतिथियों, प्रबंध समिति के सदस्यों, आचार्यों, अभिभावकों और मीडिया बंधुओं का हृदय से आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का समापन सामूहिक राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ और मिष्ठान वितरण के साथ अत्यंत उल्लासपूर्ण वातावरण में हुआ।

 

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