नारायणी नदी का कटान सुस्ता बस्ती के करीब पहुंच गया है

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
13/09/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – नवलपरासी में सुस्ता ग्रामीण नगर पालिका-5 सुस्ता में नारायणी नदी का लगातार कटाव सुस्ता के थारू बस्ती तक पहुंच गया है।

सुस्ता निवासी मुंसी कुमार हरिजन के मुताबिक, नारायणी नदी के लगातार कटाव के कारण थारू बस्ती तक पहुंचने का रास्ता महज 50 मीटर ही बचा है।

उन्होंने कहा, “हालांकि सुस्ता में अस्थायी बांध का निर्माण जारी है, लेकिन नारायणी नदी का कटान बस्ती तक पहुंच गया है।

मेरे द्वारा लगाए गए 10 गांठ गन्ने की फसल को नारायणी नदी ने काट कर नदी में मिला दिया है।

मेरे सहित एक दर्जन से अधिक किसानों का लगभग 15 वर्ग मीटर क्षेत्र में नारायणी ने काट लिया है, जिसमें चावल, गन्ना और केले की फसलें शामिल हैं।”

एक स्थानीय हरिजन ने कहा कि अगर अब भी कटान नहीं रुका तो अगले कुछ दिनों में नारायणी सुस्ता के थारू टोल को काट देगी। थारू टोल के कुछ स्थानीय लोग सुस्ता में सामुदायिक भवन के सहारे रह रहे हैं।

नारायणी ने सीमा समझे जाने वाले सिमल (वृक्ष) को उखाड़ दिया

इसी तरह नेपाल और भारत के बीच सीमा स्तंभ माना जाने वाला सिमल का पेड़ भी नारायणी नदी में बह गया है।

सुस्ता बचाऊ अभियान के प्रवक्ता और स्थानीय रवींद्र जयसवाल ने बताया कि नारायणी नदी के लगातार हो रहे कटाव के कारण नेपाल और भारत के बीच सीमा चिन्ह माना जाने वाला सिमल अब नहीं रहा।

उन्होंने कहा, चूंकि नेपाल के सुस्ता और भारत के बिहार राज्य की सीमा पर कोई जंगे स्तंभ (सीमा स्तंभ) नहीं था, इसलिए बड़े सिमल के पेड़ को सीमा चिह्न माना जाता था। लेकिन नारायणी के वेल्ड में सिमल भी बह गया है।

सिमल को लंबे समय तक सुस्ता में एक स्तंभ माना जाता था। चूंकि कोई सीमा स्तंभ नहीं था, सिमल ही सीमा बन गई।

लेकिन प्रवक्ता जयसवाल ने कहा कि नारायणी की लगातार कटान ने हद कर दी है।

उन्होंने कहा कि सीमा तो बह गई है लेकिन हम जमीन बचाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं।

परियोजना के अभियंता बेल बहादुर बिश्वकर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष सूखे से बचाव के लिए भरतपुर चितवन सिंचाई एवं जल संसाधन प्रबंधन परियोजना द्वारा 11.5 करोड़ की लागत से 1 किमी तटबंध (बांध) का निर्माण कराया गया था।

उसी स्थान को जोड़कर इसी वर्ष 14.6 करोड़ की लागत से 132 मीटर तटबंध का निर्माण शुरू करने की योजना थी।

लेकिन उन्होंने कहा कि बाउंड्री की समस्या के कारण काम रुका हुआ है और अब पूरी कटिंग चल रही है।

उन्होंने कहा, “हम नारायणी नदी घाटी से बस्तियों के विनाश को रोकने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

अस्थायी बांध का निर्माण हर दिन किया जा रहा है। मैं भी कार्य स्थल पर काम कर रहा हूं और काम में सहायता कर रहा हूं।
लेकिन अब यह बात है कि कितने सफल होंगे।”

प्रोजेक्ट इंजीनियर विश्वकर्मा ने बताया कि अस्थायी बांध के निर्माण में टार नेटिंग, बोरोमा बालू व मिट्टी तथा डिजास्टर पाइन (आरसीसी स्लोप पिलर) का उपयोग किया जा रहा है।

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