ईरान पर हमले से पहले इज़राइल को मिला था भारत का साथा? मोदी की वेस्ट एशिया डिप्लोमेसी के बारे में एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?

 

ृप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
27/02?2026

काठमाण्डौ,नेपाल – इजरायली संसद में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण भारत की मध्य पूर्व नीति की आधारशिलाओं में से एक बन रहा है।

पीएम मोदी ने इजराइल के साथ रिश्ते को लेकर कम से कम एक बात तो साफ कर दी है कि इस रिश्ते पर किसी तीसरे देश का असर नहीं पड़ेगा।

भारत-इजरायल संबंधों पर अब न तो फिलीस्तीन का असर है और न ही अरब देशों का।

लेकिन मोदी का ये दौरा ऐसे वक्त हुआ है जब ईरान पर अमेरिकी हमले का खतरा मंडरा रहा है।

अमेरिकी जेट किसी भी समय ईरान पर बमबारी शुरू कर सकते हैं और उस समय भारत और इजरायल अपने रक्षा संबंधों को मजबूत कर रहे हैं।

इसलिए सवाल ये है कि क्या पीएम मोदी का ये दौरा भारत की विदेश नीति की भी परीक्षा लेगा?

भारत इज़रायल और अन्य मध्य पूर्व देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने की भी कोशिश कर रहा है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया है।

उन्होंने गाजा में इजराइल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना की और उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों का मुद्दा उठाएंगे।

लेकिन सवाल यह है कि बदलती भू-राजनीतिक स्थिति में जब ईरान खुद सऊदी-पाकिस्तान के सैन्य गठबंधन में शामिल होने को उत्सुक है तो उसे भारत-इजरायल संबंधों से दिक्कत क्यों है?

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