बंगाल में बीजेपी की जीत से हौसला बढ़ा


नेपाल की समस्या
रोहिंग्या के संदिग्ध प्रवेश के बाद भारतीय सीमा पर सख्ती. बिना आईडी के आवाजाही बंद है

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
11/05/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद रोहिंग्या शरणार्थियों और अवैध बांग्लादेशियों को बाहर निकाले जाने की अफवाह फैलने से नेपाल सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल चुनाव में अवैध घुसपैठ को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाया।

भारतीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि भाजपा सत्ता में आने पर पश्चिम बंगाल को “घुसपैठिया मुक्त” बनाएगी।

भारत में बीजेपी सरकार बनने के बाद से बंगाल में भी सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी है।

शरणार्थी बांग्लादेशी समूह, जिन्हें पिछली ममता सरकार ने शरण दी थी, अब मोदी सरकार आने के बाद से बहुत डरे हुए हैं।

खुली सीमा के कारण नेपाल में प्रवेश का खतरा भी बढ़ गया है।
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए हैं जिनमें कहा गया है कि ‘बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को भारत से खदेड़ना शुरू कर दिया गया है।’

इन हंगामे के बीच जोगबनी क्रॉसिंग के साथ-साथ देश भर की सीमाओं पर सुरक्षा जांच कड़ी कर दी गई है।

नेपाली सुरक्षाकर्मियों ने पहचान संबंधी दस्तावेज दिखाने वालों को ही सीमा पार करने की इजाजत देनी शुरू कर दी है।

पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल मालदा जिले से विराटनगर की रानी-जोगबनी सीमा तक की दूरी लगभग 199 किमी है।

पश्चिम बंगाल के नागरिक खासतौर पर आंखों के इलाज के लिए कलकत्ता एक्सप्रेस ट्रेन से नेपाल आते हैं।

प्रशासन के मुताबिक, इस रास्ते से रोहिंग्या शरणार्थियों के नेपाल में दाखिल होने की आशंका पर सुरक्षा निगरानी बढ़ा दी गई है।

इसके अलावा देश की अन्य चौकियां भी हाई अलर्ट पर हैं।
चूंकि कलकत्ता-जोगबनी ट्रेन शनिवार, मंगलवार और गुरुवार को चल रही है, इसलिए नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस संयुक्त रूप से उन दिनों विशेष जांच करती है।

कहा जाता है कि अन्य दिनों में सशस्त्र पुलिस नियमित निगरानी करती रहती है।

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