भारत हिमाचल प्रदेश में चिनाब नदी से पानी मोड़ने के लिए 8.7 किमी लंबी सुरंग का निर्माण कर रहा है, जो जलविद्युत उत्पादन और जल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट

काठमाण्डौ,नेपाल – भारत ने हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में चिनाब नदी से अतिरिक्त पानी को मोड़ने के लिए 8.7 किलोमीटर लंबी ‘चिनाब-ब्यास लिंक सुरंग परियोजना’ पर काम शुरू कर दिया है।

इस रणनीतिक कदम का उद्देश्य भारत की जलविद्युत क्षमता को बढ़ाना, जल प्रबंधन बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और देश के उत्तरी हिस्सों में जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

परियोजना की मुख्य विशेषताएं चिनाब-ब्यास लिंक सुरंग:

हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में बनने वाली 8.7 किमी लंबी इस सुरंग की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹ 2,352 करोड़ है।

जल परिवर्तन (डायवर्जन):

इसके तहत चिनाब की सहायक नदी चंद्रा नदी से अतिरिक्त पानी को सुरंगों और विशेष संरचनाओं के माध्यम से ब्यास बेसिन में भेजा जाएगा।

19 मीटर ऊंचा बैराज:

परियोजना के पहले चरण में लाहौल घाटी में नदी पर 19 मीटर ऊंचा बांध (बैराज) बनाया जाएगा। का निर्माण भी प्रस्तावित है।

प्रबंध एजेंसी:

यह निर्माण कार्य भारत की अग्रणी जलविद्युत कंपनी नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) की देखरेख में किया जा रहा है। इसके बाद पश्चिमी नदियों (जैसे चिनाब) के पानी का अधिकतम उपयोग करने के लिए इस बुनियादी ढांचे में तेजी लाई गई है।

पाकिस्तान पर प्रभाव:

चिनाब नदी का पानी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की कृषि और ऊर्जा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

भारत द्वारा इस अंतर-बेसिन स्थानांतरण (नदियों को जोड़ने) के बाद पाकिस्तान की ओर बहने वाले अतिरिक्त पानी की मात्रा सीमित हो जाएगी।

एक अन्य प्रमुख परियोजना:

इसके समानांतर, जम्मू-कश्मीर में सलाल बांध की परिचालन क्षमता और जल भंडारण में सुधार के लिए ₹268 करोड़ की लागत से एक अलग तलछट प्रबंधन बाईपास सुरंग (सेडिमेंट बाईपास टनल) पर भी काम शुरू किया गया है।

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