अंतरिक्ष में भारत ने कमाल कर दिया चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने लैंडर क्रैश के बावजूद चांद पर बर्फ खोजी

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
31/05/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – भारत के चंद्रयान-2 मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उपसतह बर्फ के मजबूत संकेत मिले हैं।

यह खोज चंद्रमा पर भविष्य के मानव मिशनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

यह अध्ययन एनपीजे स्पेस एक्सप्लोरेशन जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

अहमदाबाद स्थित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 ऑर्बिटर के रडार डेटा का अध्ययन किया।

चंद्रयान-2 2019 से चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, बर्फ चंद्रमा की सतह पर नहीं बल्कि जमीन के नीचे छिपी हुई है।

यह बर्फ उन गड्ढों में मौजूद हो सकती है जहां सूरज की रोशनी कभी नहीं पहुंचती।

बड़े गड्ढों के अंदर कुछ छोटे-छोटे गड्ढे हैं और दोनों हमेशा अंधेरे में रहते हैं। इन्हें ‘दोहरी छाया वाले’ क्षेत्र कहा जाता है। यहां का तापमान माइनस 248 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, इसलिए बर्फ को अरबों वर्षों तक संरक्षित रखा जा सकता है।

चंद्रयान-2 पर दोहरी आवृत्ति सिंथेटिक एपर्चर रडार चंद्रमा की सतह पर माइक्रोवेव सिग्नल भेजता है और अध्ययन करता है कि वे कैसे लौटते हैं।

बर्फ इन संकेतों को चट्टानों और धूल से अलग ढंग से प्रतिबिंबित करती है।

इसरो के मुताबिक, वैज्ञानिकों को दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में चार ऐसे गड्ढों में रडार सिग्नल मिले हैं जो जमीन के नीचे बर्फ की मौजूदगी की ओर इशारा करते हैं। कुल नौ क्रेटर का अध्ययन किया गया।

इनमें से एक छोटा सा क्रेटर सबसे खास माना जाता है। यह लगभग 1.1 किलोमीटर चौड़ा है और बड़े फॉस्टिनी क्रेटर के अंदर स्थित है।

वैज्ञानिकों को यहां सबसे पुख्ता सबूत मिले हैं. इस क्रेटर की बाहरी संरचना भी अलग दिखती है, जिससे पता चलता है कि उल्कापिंड के प्रभाव के दौरान जमीन के नीचे की बर्फ बाहर की ओर फैल गई होगी।

वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी भविष्य के मानव मिशनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी।

जमीन से पानी निकालना बहुत महँगा और कठिन काम है। यदि चंद्रमा पर बर्फ है तो उसे पिघलाकर पीने का पानी बनाया जा सकता है।

इसके अलावा पानी से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग करके भी रॉकेट ईंधन बनाया जा सकता है।

इस वजह से चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव दुनिया की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है।

इसरो ने कहा है कि यह खोज भविष्य के चंद्र अभियानों की योजना बनाने और चंद्रमा पर संसाधनों के उपयोग के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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