DM हर्षिता माथुर की संवेदनशीलता ने दिव्यांगो का जीता दिल

जनसुनवाई में दिव्यांग को मिली बैसाखी, अब जिले में ही मिलेंगे कृत्रिम उपकरण*

रायबरेली। अपनी कार्यशैली और मानवीय दृष्टिकोण के लिए चर्चित रायबरेली की जिलाधिकारी हर्षिता माथुर ने एक बार फिर मिसाल पेश की है। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित जनसुनवाई के दौरान डीएम का मानवीय चेहरा उस वक्त सामने आया, जब उन्होंने एक असहाय दिव्यांग बुजुर्ग को अपनी फरियाद लेकर आते देखा। जिलाधिकारी ने न केवल उनकी समस्या सुनी, बल्कि तत्काल मौके पर ही बैसाखी की व्यवस्था कराकर बुजुर्ग के चेहरे पर मुस्कान ला दी।
डलमऊ से चलकर आया था फरियादी
जानकारी के अनुसार, डलमऊ तहसील क्षेत्र का रहने वाला एक बुजुर्ग दिव्यांग अपनी फरियाद लेकर बड़ी उम्मीद के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा था। चलने-फिरने में असमर्थ बुजुर्ग को देखते ही डीएम हर्षिता माथुर ने उन्हें अपने पास बुलाया। उन्होंने पूरी आत्मीयता से बुजुर्ग की समस्याओं को सुना और संबंधित अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए। जब उन्हें पता चला कि बुजुर्ग को चलने में अत्यधिक कठिनाई हो रही है, तो उन्होंने तत्काल बैसाखी मंगवाई। नई बैसाखी का सहारा मिलते ही बुजुर्ग की आंखें नम हो गईं और उन्होंने भावुक होकर जिलाधिकारी को ढेरों आशीर्वाद दिए।
दिव्यांगों के लिए बड़ी सौगात: जिले में खुलेगा एलिम्को (ALIMCO) का केंद्र
जिलाधिकारी केवल तात्कालिक मदद तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने जिले के सभी दिव्यांगजनों के लिए एक स्थाई समाधान की भी घोषणा की है। हर्षिता माथुर ने बताया कि अब रायबरेली के दिव्यांगों को कृत्रिम अंगों और उपकरणों के लिए कानपुर या अन्य बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
इसके लिए उन्होंने एलिम्को (भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम) कंपनी को कार्यालय खोलने के लिए जगह उपलब्ध करा दी है। इस केंद्र के खुलने से अब जिले के दिव्यांगों को उनके आवश्यक उपकरण, जैसे ट्राइसाइकिल, कैलिपर्स और श्रवण यंत्र, स्थानीय स्तर पर ही सुलभ हो सकेंगे।
“हमारा निरंतर प्रयास है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति, विशेषकर दिव्यांगों और गरीबों की मदद प्राथमिकता के आधार पर हो। एलिम्को का केंद्र खुलने से अब दिव्यांगजनों को उपकरणों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।”

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