सरकार आयातित वस्तुओं की एमआरपी पर लचीली है, जिसे सीमा शुल्क पर ‘स्व-घोषणा’ द्वारा माफ किया जा सकता है

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
30/04/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – आयातित वस्तुओं पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) का उल्लेख अनिवार्य रूप से करने से सीमा शुल्क में बाधा उत्पन्न होने के बाद सरकार ने समस्या के समाधान और निरीक्षण प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नए निर्देश दिए हैं।

नई व्यवस्था के मुताबिक, अब आयातक सीमा शुल्क केंद्र तक पहुंच चुके सामान की एमआरपी का विवरण स्वयं घोषित कर सकेगा।

इसी तरह, सरकार ने सीमा शुल्क बिंदु पर स्व-घोषणा की सुविधा प्रदान की है और लिखित प्रतिबद्धता दी है कि सामान आयात होने के बाद, ‘मैं वितरण से पहले उन्हें एक लेबल के साथ ही भेजूंगा।’

सीमा शुल्क विभाग ने उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि विशेष रूप से औद्योगिक कच्चे माल, मशीनरी, उपकरण और फल और सब्जियों जैसी खराब होने वाली वस्तुओं के निरीक्षण में समस्या आ रही है।

वाणिज्य, आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने 30 मार्च 2015 को एक अधिसूचना जारी की थी और 15 मई से सभी आयातित वस्तुओं के लिए एमआरपी अनिवार्य कर दिया था।

विभाग ने निष्कर्ष निकाला कि आगामी वित्तीय वर्ष (2083/84 वि. सं.) के लिए नीति और कार्यक्रम, बजट और वित्तीय कानून की तैयारी के संदर्भ में एमआरपी संबंधित मामलों को कानून के माध्यम से और अधिक स्पष्ट किया जा सकता है।

सरकार द्वारा 28 अप्रेल से विदेश से आयातित वस्तुओं पर एमआरपी लेबल लगाना अनिवार्य किये जाने के बाद अधिकांश आयातित वस्तुओं का सीमा शुल्क निरीक्षण ठप हो गया।

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