7 पूर्व राजदूतों ने सरकार से सीमा सुरक्षा के लिए कूटनीतिक पहल शुरू करने की अपील की

 

संवेदनशील एवं प्रभावी विदेश नीति अपनाने का आग्रह

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
04/05/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – चीन में नेपाल के पूर्व राजदूतों ने सरकार से संवेदनशील और प्रभावी विदेश नीति अपनाने की अपील की है।

नेपाल और चीन के बीच राजनयिक संबंधों के 70 साल पूरे होने के मौके पर चीन में नेपाल के पूर्व राजदूत राजेश्वर आचार्य, महेंद्र पांडे, टैंक कार्की, महेश मस्के, लीलामणि पौडेल, बिष्णु पुकार श्रेष्ठ और कृष्ण प्रसाद ओली ने एक संयुक्त बयान जारी कर सरकार से अनुरोध किया।

उनकी अपील भारत द्वारा नेपाल के लिपुलेख के माध्यम से चीन के मानसरोबार तक सड़क खोलने के संदर्भ में सार्वजनिक की गई है।

यह कहते हुए कि नेपाल और चीन के बीच सदियों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंध अब जटिल नहीं हो रहे हैं और भू-राजनीतिक चुनौतियाँ बढ़ गई हैं, उन्होंने याद दिलाया है कि नेपाल ने हमेशा एक-चीन नीति का दृढ़ता से पालन किया है और नेपाल की भूमि का उपयोग किसी भी मित्र शक्ति के खिलाफ नहीं करने देने की नेपाली सरकार की प्रतिबद्धता है।

चूंकि लिपुलेख, कालापानी और लिपियाधुरा नेपाल के अभिन्न अंग हैं, इसलिए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चीन और भारत नेपाल की संप्रभुता के प्रति संवेदनशील होंगे।

नेपाल की ओर से कल जारी बयान का फायदा उठाते हुए उन्होंने सरकार का ध्यान अपनी संप्रभु सीमा की सुरक्षा के लिए तत्काल कूटनीतिक पहल करने की ओर भी आकर्षित किया है।

उन्होंने कहा, “साथ ही, वर्तमान संघर्षग्रस्त विश्व राजनीतिक और कूटनीतिक स्थिति, मध्य पूर्व में संघर्ष और नेपाल पर इसके प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभावों के बारे में गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, हम यह भी विश्वास व्यक्त करते हैं कि नेपाली सरकार एक संवेदनशील और प्रभावी विदेश नीति अपनाएगी।”

उनकी आम राय है कि वर्तमान विश्व परिवेश में नेपाल को नेपाल और चीन के बीच बीआरआई समेत सभी आर्थिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और विकास परियोजनाओं को लागू करने और चलाने के लिए मजबूती से आगे बढ़ना चाहिए।

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