जापान में युवा लोग यह कहते-कहते थकने लगे कि ‘जीना मुश्किल है’, जन्म दर का संकट गहरा गया

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
09/05/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – जापान की लगातार गिरती जन्म दर अब सिर्फ आर्थिक समस्याओं से जुड़ी नहीं है।

कई युवा कर्मचारी शिकायत करने लगे हैं कि अत्यधिक काम के दबाव के कारण उनकी निजी जिंदगी बर्बाद हो रही है।

टोक्यो के एक 26 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर का कहना है कि सुबह 7 बजे घर से निकलना और अक्सर आधी रात को लौटना आम बात हो गई है।

बताया जाता है कि एक ही शहर में रहने के बावजूद उन्होंने तीन साल से अपने पिता को नहीं देखा है।

सरकार आवास सहायता, नकद प्रोत्साहन और डेटिंग कार्यक्रमों के माध्यम से विवाह और जन्म दर बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

लेकिन कई युवाओं के अनुसार मुख्य समस्या पैसा नहीं, बल्कि “समय की कमी” है।

लंबे समय तक ओवरटाइम, सप्ताहांत कार्यालय संस्कृति और घटते व्यक्तिगत समय के कारण यह शिकायत बढ़ रही है कि रिश्तों को बनाए रखना कठिन होता जा रहा है।

जापान की जन्म दर लगातार दसवें वर्ष नए निचले स्तर पर पहुंचने के बाद, कार्य-जीवन संतुलन के बारे में बहस तेज हो गई है।

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