इटाहारी से अपहृत एक सशस्त्र पुलिसकर्मी की साहसी आत्मरक्षा; आंध्र प्रदेश की पहाड़ियों से कैसे बचाई गई जान

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
06/06/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – इटाहारी बस पार्क जैसे व्यस्त स्थान से सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के एक जवान के अपहरण और भारत के आंध्र प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में उसकी बरामदगी ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मोरंग जिला के जहदा ग्रामीण नगर पालिका-7 निवासी सशस्त्र पुलिस कांस्टेबल रामकुमार सिंह (राजपूत) के अपहरण और उसकी नाटकीय वापसी ने आम नागरिकों को झकझोर कर रख दिया है।

इटहारी में क्या हुआ?

सिंह, जो तेहराथुम जिला में अपने कार्य क्षेत्र में जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे थे, को एक अज्ञात गिरोह ने जानबूझकर निशाना बनाया।

बस का आधे घंटे लेट होना अपराधियों के लिए मौका बन गया।

पीड़िता के मुताबिक, उसे नशीला पदार्थ खिलाकर अपहरण कर लिया गया।

बस पार्क से आए दिन सुरक्षा गार्ड के गायब होने से नेपाल की आंतरिक सुरक्षा में गंभीर कमजोरी उजागर हुई है।

मौत के मुँह से वापस आये
सिंह खुद को नेपाल से हजारों किलोमीटर दूर भारत के आंध्र प्रदेश के एक उजाड़ पहाड़ी इलाके में पाकर हैरान रह गए।

अपराधियों के कब्जे से छूटने के बाद वह बीहड़ पहाड़ों में भूख-प्यास से संघर्ष करते हुए दो दिनों तक जीवित रहने में सफल रहे।

अंततः, वह एक स्थानीय नागरिक के मोबाइल फोन के माध्यम से अपने परिवार से संपर्क करके सुरक्षित घर लौटने में कामयाब रहे।

सुरक्षा एजेंसियों पर गंभीर सवाल!

एक सुरक्षाकर्मी का अपहरण होना और अपनी जान बचाकर भागना कानून-व्यवस्था की दयनीय स्थिति को उजागर करता है। सुरक्षाकर्मी असुरक्षित हैं तो आम जनता का क्या होगा?

हालाँकि वह अब सुरक्षित घर वापस आ गया है, लेकिन इस घटना से काफी दहशत फैल गई है।

क्या यह किसी संगठित मानव तस्कर या आपराधिक गिरोह का सुनियोजित खेल है?
या कोई बड़ी साजिश?

प्रशासन को इस घटना की तह तक जाकर तुरंत सच सामने लाना चाहिए।

सूत्रों का यह भी दावा है कि इस घटना के कारण भारतीय सेना पुलिस को नेपाल के एपीएफ के परिचालन कौशल सीखने को मिले होंगे।

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