भारत ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर सहमति का स्वागत किया

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
16/06/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – भारत ने पश्चिम एशिया में संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति का स्वागत किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि क्षेत्र में पूर्ण शांति और स्थिरता स्थापित होगी और बाकी मुद्दों का भी स्थायी समाधान निकलेगा।

उधर, शांति की घोषणा के बाद पिछले ढाई महीने से होर्मुज में फंसे जहाजों के तेजी से निकलने के संकेत मिल रहे हैं।

एलएनजी लेकर भारत आ रहा एक जहाज भी वहां से निकल चुका है।

साथ ही भारत अब ईरान से दोबारा बड़ी मात्रा में तेल खरीदने की संभावना तलाश रहा है।

जैसे-जैसे पश्चिम एशिया के समीकरण में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, भारत इन बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को मजबूत करने के लिए एक नया समीकरण बनाने की तैयारी कर रहा है।

इस क्षेत्र में रहने वाले एक करोड़ से अधिक नागरिकों की सुरक्षा, इस क्षेत्र की ऊर्जा आपूर्ति में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी और संयुक्त अरब अमीरात, इज़राइल, सऊदी अरब जैसे रणनीतिक साझेदारों की मौजूदगी का यहां भारत के हित से सीधा संबंध है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने इस समझौते की घोषणा के कुछ घंटों बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म
“भारत को उम्मीद है कि इस समझ के कार्यान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होगी और नेविगेशन और वाणिज्य की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।

हम शेष मुद्दों पर चर्चा जारी रखने और अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए उत्सुक हैं।”

ईरान के साथ चल रहे विवाद पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समझौते की घोषणा के तुरंत बाद खबर आई है कि भारतीय एलएनजी टैंकर ‘दिशा’ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिमी हिस्से से सफलतापूर्वक बाहर आ गया है।

कतर से 62,370 टन एलएनजी लेकर टैंकर ईरानी मार्ग के पास लारक द्वीप के पास से गुजरते हुए भारत के लिए रवाना हो गया है और 18 जून को दहेज बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है।

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