सरस्वती शिशु मंदिर रेलविहार में भव्य ‘शपथ ग्रहण समारोह’ हुआ संपन्न: छात्र संसद, बाल-कन्या भारती व मातृ भारती के पदाधिकारियों ने ली निष्ठा की शपथ
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गोरखपुर, जनपद के रेल विहार राप्तीनगर में स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर (10+2)
के प्रांगण में आज लोकतंत्र की प्राथमिक पाठशाला के रूप में छात्र संसद, कन्या भारती, बाल भारती, शिशु भारती एवं मातृ भारती का भव्य ‘शपथ ग्रहण समारोह’ अत्यंत गरिमामयी और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती के चरणों में वंदना से हुआ।
संगीताचार्य अभिषेक उपाध्याय जी के कुशल निर्देशन में वंदना व सुमधुर संगीत की प्रस्तुति मेधावी छात्राओं— बहन सान्वी मिश्रा एवं बहन परी पाण्डेय द्वारा दी गई। इस संपूर्ण गौरवशाली कार्यक्रम का अत्यंत प्रभावकारी व मंच-सज्जित संचालन विद्यालय की छात्राओं बहन जिज्ञासा सत्संगी, बहन सान्वी मिश्रा एवं बहन परी पाण्डेय द्वारा किया गया।
समारोह की शुरुआत में विद्यालय के यशस्वी प्रधानाचार्य विनोद सिंह राठौर जी ने मंच पर मंचासीन सभी अतिथियों का परिचय कराया। इसके पश्चात परंपरा के अनुसार सम्मान सत्र का आयोजन हुआ
मुख्य अतिथि पूर्व सांसद डॉ. रमापति राम त्रिपाठी जी का स्वागत गोरक्ष प्रांत के संभाग निरीक्षक अजय दुबे जी ने अंगवस्त्र भेंट कर किया।
विशिष्ट अतिथि गोरखपुर के महापौर मंगलेश श्रीवास्तव जी (जो स्वयं विद्या भारती के पुरातन छात्र रहे हैं) तथा संभाग निरीक्षक अजय दुबे जी एवं डॉ. के. सी. पति त्रिपाठी जी का स्वागत विद्यालय के कोषाध्यक्ष अजय पाण्डेय जी द्वारा अंगवस्त्र प्रदान कर किया गया।
विशेष अतिथि शाहपुर थाने की उप-निरीक्षक एवं ‘मिशन शक्ति’ गोरखपुर की प्रभारी बहन हर्षिता सिंह जी का सम्मान विद्यालय की उप-प्रधानाचार्या श्रीमती रुक्मिणी उपाध्याय जी द्वारा किया गया।कार्यक्रम में पधारे मीडिया बंधुओं का सम्मान विद्यालय के मीडिया प्रभारी प्रेम सागर तिवारी जी ने डायरी और पेन भेंट कर किया।
अतिथियों ने नवनिर्वाचित छात्र-प्रतिनिधियों को उनके पदों की निष्ठा और कर्तव्यपरायणता की शपथ दिलाई:
शिशु भारती एवं छात्र संसद: पूर्व सांसद डॉ. रमापति राम त्रिपाठी जी ने पदाधिकारियों को शपथ दिलाई।
कन्या भारती: गोरखपुर के महापौर श्री मंगलेश श्रीवास्तव जी ने छात्राओं को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
बाल भारती: गोरक्ष प्रांत के संभाग निरीक्षक श्रीमान अजय दुबे जी ने बाल भारती के सदस्यों को शपथ दिलाई।
मातृ भारती:मिशन शक्ति प्रभारी बहन हर्षिता सिंह जी ने मातृ भारती की सदस्याओं को दायित्वों की शपथ दिलाई।
कार्यक्रम के मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य श्रीमान विनोद सिंह राठौर जी ने सारगर्भित और प्रेरणादायी भाषण दिया
उन्होंने कहा, “आज का यह शपथ ग्रहण समारोह केवल बैज या पद प्राप्त करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह हमारे भैया-बहनों के भीतर भावी नेतृत्व, नागरिक बोध और अनुशासन के सिंचन का संकल्प दिवस है। छात्र संसद और भारती व्यवस्थाओं के माध्यम से विद्या भारती अपने विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक मूल्यों, सेवा भाव और उत्तरदायित्व की भावना से जोड़ती है। जब एक छात्र अपने विद्यालय स्तर पर व्यवस्थाओं को चलाना सीखता है, तो आगे चलकर वह देश और समाज का कुशल नेतृत्व करने के योग्य बनता है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आज शपथ लेने वाले सभी छात्र प्रतिनिधि अपने आचरण, कठोर परिश्रम और अनुशासित व्यवहार से विद्यालय का मान बढ़ाएंगे और अपने साथियों के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत करेंगे।”
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं पूर्व सांसद डॉ. रमापति राम त्रिपाठी जी ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई दी और विद्या भारती के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया
अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा, “मैं छात्र संसद और विभिन्न भारत्तियों के सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई देता हूँ। विद्या भारती केवल शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक महायज्ञ है। 1952 में गोरखपुर की पावन धरती से ही ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ का जो पहला पौधा रोपा गया था, वह आज वटवृक्ष बनकर पूरे देश में लाखों युवाओं को शिक्षा के साथ-साथ देशभक्ति और सनातन संस्कारों से सुशोभित कर रहा है। आज के इन नवनिर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों में मुझे भारत के स्वर्णिम भविष्य की झलक दिखाई देती है।”
कार्यक्रम के अन्य सम्मानित अतिथि डॉ. के. सी. पति त्रिपाठी जी ने भारतीय शिक्षा दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यह संस्था किताबी ज्ञान से परे शिक्षा और संस्कार को पिरोने का पावन कार्य करती है, जो हमारी प्राचीन गुरुकुल अवधारणा का आधुनिक स्वरूप है।” उन्होंने महर्षि पाणिनि से जुड़े प्रसंग का स्मरण कराते हुए ‘पंचपदीय शिक्षा पद्धति’ पर विशेष बल दिया और युवाओं में ऊर्जा भरते हुए इन पंक्तियों के साथ अपनी वाणी को विराम दिया:
“मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है,पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।
विद्यालय की उप-प्रधानाचार्या रुक्मिणी उपाध्याय जी ने के अपने उद्बोधन में कहा, “पद के साथ सदैव उत्तरदायित्व आता है। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को नम्रता, सेवा भाव और अनुशासन को अपना आभूषण बनाना चाहिए। जब आप स्वयं अनुशासित रहेंगे, तभी अपने सहपाठियों को सही दिशा दिखा सकेंगे। आप सभी अपने कर्तव्यों का पालन निष्ठा से करें।”
कार्यक्रम के अंतिम चरण में विद्यालय के कोषाध्यक्ष अजय पाण्डेय ने देशप्रेम से ओत-प्रोत इन पंक्तियों से अपने आभार ज्ञापन की शुरुआत की:
“जमीं पर घर बनाया हमने,और स्वर्ग में रहते थे;हमारी खुशनसीबी है कि हम भारत में रहते हैं।”
उन्होंने पधारे हुए सभी अतिथियों, मीडिया बन्धुओ आचार्यों व छात्र-छात्राओं का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया। अंत में, संपूर्ण परिसर में गूँजते हुए पवित्र ‘वंदे मातरम्’ (राष्ट्रगीत) के सामूहिक गान के साथ इस ऐतिहासिक ‘शपथ ग्रहण समारोह’ का सफल समापन हुआ इस अवसर पर बाल भारती प्रमुख क्षमा त्रिपाठी, कन्या भारती प्रमुख प्रियंका सिंह, मातृ भारती प्रमुख माया मिश्रा , अभिषेक तिवारी, मनीष राम तिवारी मनीष प्रजापति सत्यम जी एवं समस्त आचार्य आचार्या बंधु भगिनी उपस्थित रहे

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