हिन्दू संगठित होगा, तभी राष्ट्र व विश्व का कल्याण संभव : अनिल

 

विराट हिन्दू सम्मेलन भव्य एवं अनुशासित वातावरण में सम्पन्न

 

काली मन्दिर, बरदहिया बाजार (आनन्द नगर), महराजगंज।
दिनांक 24 दिसम्बर 2025 को आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन गरिमामय, अनुशासित एवं राष्ट्रभाव से ओत-प्रोत वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आवरणीय अनिल (क्षेत्र प्रचारक, पू. उ.) तथा मुख्य अतिथि श्री श्री 1008 श्रीमंत महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी महेश योगी जी महाराज (महंत – सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी, श्री अयोध्या धाम) रहे।

कार्यक्रम का शुभारम्भ गणेश वंदना एवं महाभारत के दृश्य गीत से हुआ। इसके पश्चात आवरणीय अनिल जी द्वारा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ किया गया। मुख्य वक्ता एवं अतिथियों का स्वागत पुष्पवर्षा, शंखनाद एवं तिलक के साथ किया गया।

कार्यक्रम का संचालन अरविन्द मिश्र द्वारा किया गया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री राम पाण्डेय ने की। संपूर्ण कार्यक्रम संगठन की उत्कृष्ट अनुशासनबद्धता एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ।

उद्बोधन की प्रमुख बातें

अनुराधा श्रीवास्तव ने कहा कि मातृशक्ति की भूमिका राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा समाज को एकजुट होकर कार्य करना होगा।

डॉ. स्वामी महेश योगी जी महाराज ने कहा कि भारत संतों एवं धर्म की भूमि है। जब-जब अधर्म बढ़ा है, तब-तब धर्म का उत्थान हुआ है। उन्होंने सनातन संस्कृति को भारत की आत्मा बताया।

आवरणीय अनिल ने कहा कि हिन्दू सम्मेलन देश के प्रत्येक कोने में आयोजित हो रहे हैं। हिन्दू धर्म सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की भावना रखता है और हिन्दू समाज के संगठित होने से ही राष्ट्र एवं विश्व का कल्याण संभव है।

वक्ताओं ने अपने संबोधनों में मातृशक्ति, भगवा ध्वज, भारतीय शिक्षा प्रणाली, संस्कृति संरक्षण एवं सामाजिक एकता पर विशेष बल दिया।

कार्यक्रम के अंत में श्री राम पाण्डेय द्वारा सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। तत्पश्चात भारत माता की आरती के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।

इस अवसर पर विवेक , राजीव नयन , अजीत , परमात्मा , अजय सिंह, बजरंग बहादुर राजेश , सुनील पाण्डेय , नागेन्द्र जी, हिमांशु , अजय गोविन्द चौधरी शिवेन्द्र सिंह बजरंग बहादुर रविन्द्र अरुण निशिनाथ पाण्डेय अजय विवेक वेदप्रकाश विजयपति हिमांशु नागेन्द्र प्रद्युम्न गोविंद सुनील विजय सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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