प्राचीन हनुमान मंदिर सुरजूपुर विवाद: भंडाफोड़ से बौखलाए तत्वों ने रचा कुचक्र,सचिव प्रत्यूष अवस्थी ने की त्वरित जांच की मांग

 

 

“कथित फर्जी कार्यकारिणी और झूठे आरोपों के पीछे पुराने दीवानी विवाद और रंजिश का हाथ, निष्पक्ष न्याय के लिए प्रशासन से गुहार”

रायबरेली। प्राचीन हनुमान मंदिर सुरजूपुर की कीमती संपत्तियों को लेकर विवाद लगातार गर्माता जा रहा है। मंदिर सेवा ट्रस्ट के असली सचिव व अधिवक्ता प्रत्यूष अवस्थी ने पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच कराने की मांग की है।

अधिवक्ता प्रत्यूष अवस्थी का आरोप है कि मंदिर की बहुमूल्य संपत्तियों व व्यवस्थाओं में हो रही कथित वित्तीय गड़बड़ियों का उनके द्वारा भंडाफोड़ किए जाने से बौखलाकर विरोधी तत्वों ने साजिश एक कथित फर्जी कार्यकारिणी/ट्रस्ट का गठन कर लिया है। उन्होंने पुलिस के आलाधिकारियों को सौंपे गए शिकायती पत्र में स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ लगाए गए मारपीट, गाली-गलौज और ठगी के सभी आरोप पूरी तरह से निराधार, मनगढ़ंत और असत्य हैं। यह सब केवल असली मुद्दों से ध्यान भटकाने और उन पर अनुचित दबाव बनाने के लिए कथित ‘फर्जी अध्यक्ष’ के इशारे पर पुजारी द्वारा प्रायोजित किया गया है, जिसका उद्देश्य पुराने दीवानी भूमि विवाद (वाद संख्या – 56/2016) की रंजिश को भुनाना है।

CCTV जब्त करने और परिसर से हटाने की मांग:
सचिव प्रत्यूष अवस्थी ने प्रशासन से पुरज़ोर मांग की है कि कथित घटना वाले दिन की CCTV फुटेज और DVR को तत्काल पुलिस संरक्षण में लेकर तकनीकी जांच कराई जाए, जिससे बहुरूपियों द्वारा रचे गए इस कथित झूठे कुचक्र का सच सबके सामने आ सके। इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच पूरी होने तक साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए आरोपी पक्ष को प्राचीन हनुमान मंदिर सुरजूपुर के परिसर की गतिविधियों से तत्काल प्रभाव से दूर रखा जाए ताकि सच्चाई निर्बाध रूप से सामने आ सके।

कानूनी सुरक्षा नोट इस समाचार आलेख में पत्रकारिता के मानकों के अनुसार ‘आरोप है’, ‘कथित’ और ‘जांच की मांग’ जैसे विधिक रूप से सुरक्षित शब्दों का प्रयोग किया गया है। यह आलेख किसी भी पक्ष पर सीधे दोषारोपण न करके केवल प्रेषित प्रार्थना पत्र और प्रशासनिक जांच की मांग पर आधारित है, जिससे मानहानि की कानूनी गुंजाइश को सुरक्षित किया जा सके।

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