पाकिस्तान-ईरान सीमा व्यापार चौथे दिन भी बंद: सैकड़ों कंटेनर फंसे

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट

काठमाण्डौ,नेपाल – पाकिस्तान और ईरान के बीच प्रमुख सीमा चौकियों से व्यापार लगातार चौथे दिन पूरी तरह बंद रहा।

इससे पहले 17 अक्टूबर से अनिश्चित काल के लिए बंद इन सीमाओं के कारण बलूचिस्तान के रास्ते दोनों पड़ोसी देशों के बीच होने वाली व्यावसायिक गतिविधियां बंद हो गई हैं और सामान से भरे सैकड़ों कंटेनर सीमा के दोनों ओर फंसे हुए हैं।

सीमा बंद होने के कारण और दावे

हालाँकि ईरान और पाकिस्तान दोनों का दावा है कि व्यापार पर यह प्रतिबंध अस्थायी है, दोनों पक्षों ने सीमा बंद करने के पीछे अलग-अलग कारण सामने रखे हैं।

बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता और मुख्यमंत्री के सलाहकार शाहिद रिंद ने स्पष्ट किया कि यह कदम सुरक्षा चिंताओं को दूर करने, तस्करी को रोकने और सीमा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उठाया गया है।

उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्र की प्रशासनिक समस्याओं के समाधान की दिशा में सकारात्मक प्रगति हो रही है और जल्द ही सीमा खोल दी जायेगी।

दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने कहा कि कुछ “तकनीकी समस्याओं” के कारण एहतियात के तौर पर सीमा को तुरंत बंद करना पड़ा।

सीमा बंद होने से ठीक एक दिन पहले यानी 16 अक्टूबर को पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय ने ईरान से सामान आयात करने के लिए ‘इलेक्ट्रॉनिक आयात फर्मों’ को दी गई विशेष छूट अचानक वापस ले ली।

इस फैसले से कुछ दिन पहले ही ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की पाकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आपसी व्यापार को 10 अरब डॉलर तक बढ़ाने की इच्छा जताई थी।

सीमा पर फंसे कंटेनरों और व्यापारियों को लेकर चिंता

ग्वादर चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष शम्सुल हक के अनुसार, चावल, आलू और केले के कंटेनर वाले लगभग 1,500 वाहनों को अकेले गबाद-रिमदान सीमा चौकी पर पाकिस्तान की ओर रोका जाता है।

इसी तरह, ईरान की ओर एलपीजी गैस ले जाने वाले करीब 3,000 कंटेनर फंसे हुए हैं।

बॉर्डर ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल गफूर के अनुसार, गर्म फल और सूखे मेवे जैसे खराब होने वाले सामान ले जाने वाले वाहनों को गुजरने की अनुमति नहीं होने के कारण पाकिस्तानी व्यापारियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो पाएगी।

सोशल मीडिया पर भी इस बंद को अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक दबाव की भूमिका से जोड़कर चर्चा होने लगी है।

व्यापार में कूटनीतिक जटिलताएँ

ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण बैंकों के माध्यम से लेन-देन आसानी से करना संभव नहीं है, इसलिए सीमा क्षेत्र में कुछ विशेष छूट की व्यवस्था की गई।

हालांकि, आर्थिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि पाकिस्तान में ईरानी सामानों की बाढ़ और स्थानीय उद्योगों पर असर के कारण सरकार ने यह कदम उठाया है।

क्वेटा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने सभी व्यापारियों से स्पष्ट सरकारी नीति आने तक ईरान से नए सामान की बुकिंग या खरीदारी करने से परहेज करने और अत्यधिक सावधानी बरतने की अपील की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *