दिव्यांगजनों के हुनर से सजा मंडल स्तरीय दिव्य दीपावली मेला, सीडीओ ने फीता काटकर व दीप प्रज्वलित कर किया उद्घाटन

 

 

सीडीओ ने की खरीदारी, परियोजना निदेशक दीपक सिंह और डीसी मनरेगा समेत अधिकारियों ने भी बढ़ाया दिव्यांगजनों का उत्साह

हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी में दिखी रचनात्मकता, दीपावली की सजावटी वस्तुओं से सजे स्टॉल

गोरखपुर जनपद मे दिव्यांगजनों की प्रतिभा, मेहनत और हुनर को प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को विकास भवन परिसर में मंडल स्तरीय दिव्य दीपावली मेला-2026 का आयोजन किया गया। मेले का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी ने फीता काटकर एवं दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन के बाद उन्होंने मेले में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण किया और दिव्यांगजनों द्वारा अपने हाथों से तैयार किए गए उत्पादों की खरीदारी कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस दौरान उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता, कलात्मकता और उपयोगिता की सराहना करते हुए कहा कि दिव्यांगजनों के भीतर प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत है उनके हुनर को उचित मंच और बाजार उपलब्ध कराने की।

मेले में परियोजना निदेशक दीपक सिंह, डीसी मनरेगा समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने विभिन्न स्टॉलों पर पहुंचकर दिव्यांगजनों के बनाए उत्पादों को देखा और दीपावली के लिए खरीदारी की। अधिकारियों की ओर से की गई खरीदारी से स्टॉल लगाने वाले दिव्यांगजन काफी उत्साहित नजर आए। मेले में खरीदारी के साथ ही लोगों को दिव्यांगजनों की मेहनत, रचनात्मकता और आत्मनिर्भर बनने के उनके प्रयासों को करीब से जानने का अवसर मिला।

जिला प्रशासन की ओर से आयोजित इस मंडल स्तरीय मेले में गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महाराजगंज के दिव्यांगजन अपने हाथों से तैयार किए गए आकर्षक उत्पाद लेकर पहुंचे। मेले में दीपावली के त्योहार को ध्यान में रखते हुए मिट्टी के दीये, लक्ष्मी-गणेश की आकर्षक मूर्तियां, घरों को सजाने के लिए विभिन्न प्रकार के सजावटी सामान, मिट्टी की कलाकृतियां और हस्तनिर्मित वस्तुओं के स्टॉल लगाए गए। इसके अलावा जूट से बने डोरमैट, बैग, मोतियों की माला, चित्रकला, मोमबत्ती, अगरबत्ती, झाड़ू, थैले और भगवान की आकर्षक पोशाक भी बिक्री के लिए उपलब्ध रही।

मेले में दिव्यांग कारीगरों की ओर से तैयार उत्पादों में उनकी कला और मेहनत साफ दिखाई दी। मिट्टी से बनी आकर्षक मूर्तियों से लेकर रंग-बिरंगे सजावटी सामान और जूट से तैयार उपयोगी वस्तुओं तक हर उत्पाद में अलग तरह की रचनात्मकता देखने को मिली। दिव्यांगजनों ने अपने उत्पादों को स्वयं स्टॉलों पर सजाया और लोगों को उनकी विशेषताओं की जानकारी दी। दीपावली की खरीदारी के लिए पहुंचे लोगों को एक ही स्थान पर घरेलू सजावट, पूजा-पाठ और त्योहार से जुड़ी कई तरह की वस्तुएं उपलब्ध हुईं।

मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी ने कहा कि दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे मेले उनके हुनर को पहचान दिलाने के साथ उत्पादों की बिक्री का अवसर भी प्रदान करते हैं। जब समाज के लोग दिव्यांगजनों द्वारा तैयार वस्तुओं को खरीदेंगे तो इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और स्वरोजगार को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने लोगों से अपील की कि इस दीपावली पर बाजार से खरीदारी करते समय दिव्यांगजनों के हाथों से तैयार उत्पादों को भी प्राथमिकता दें। इससे उनकी मेहनत का सम्मान होगा और उन्हें अपनी आजीविका को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

यह मेला महज खरीदारी और उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है, बल्कि दिव्यांगजनों के आत्मसम्मान, स्वावलंबन और सामाजिक भागीदारी का संदेश भी दे रहा है। जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, गोरखपुर मंडल की ओर से आयोजित इस पहल के माध्यम से गोरखपुर समेत आसपास के जिलों के दिव्यांगजनों को अपने हुनर का प्रदर्शन करने और तैयार उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिला। मेले का संदेश है कि दिव्यांगता किसी की प्रतिभा और क्षमता की राह में बाधा नहीं बन सकती। उचित अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर दिव्यांगजन भी अपने हुनर से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर सकते हैं।

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