भारत माता की सेवा का अर्थ है प्रकृति और संस्कृति की रक्षा : गोपाल आर्य”

जनपद महाराजगंज के न्यायपंचायत मिश्रौलिया अंतर्गत भारत–नेपाल सीमा पर स्थित बैठवालिया में भव्य, गरिमामय एवं ऐतिहासिक हिंदू सम्मेलन का आयोजन अत्यंत उत्साह, अनुशासन एवं राष्ट्रभाव के साथ सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ किया गया, जिससे सम्पूर्ण वातावरण राष्ट्रभक्ति एवं सनातन चेतना से ओत-प्रोत हो गया।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता अखिल भारतीय पर्यावरण संरक्षण के प्रमुख आदरणीय गोपाल आर्य जी का ओजस्वी एवं प्रेरक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत माता की सेवा का वास्तविक अर्थ प्रकृति और संस्कृति की रक्षा है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू समाज की संगठित शक्ति ही राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत है, तथा पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा और राष्ट्रहित के लिए समर्पित भाव से कार्य करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जितेंद्र पाल जी ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में जागरूकता, एकता और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करते हैं।

विभाग प्रचारक राजीव नयन ने कहा कि हिंदू समाज की संगठित चेतना ही राष्ट्र की आत्मा है, और जब समाज अपने सांस्कृतिक मूल्यों को पहचान लेता है, तब भारत को कोई भी शक्ति कमजोर नहीं कर सकती।

प्रेमलाल सिंघानिया इंटर कॉलेज की प्रबंधक शशिकला सिंह जी ने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार, राष्ट्रभाव और सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध कराना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है, क्योंकि संस्कारवान पीढ़ी ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण करती है।

कथा वाचक रामजी दास ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि जीवन जीने की वह पद्धति है जो मानव को धर्म, सेवा और राष्ट्रभाव के मार्ग पर अग्रसर करती है।

कार्यक्रम का संचालन विशाल जी द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया।

कार्यक्रम में विनय, शिवचरण, अनिल, रणजीत, हृदेश, उमाशंकर, आदित्य, रत्नलाल, अम्बरीश, बेचन, दुष्यंत, भास्कर सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा वर्ग एवं मातृशक्ति की सहभागिता रही।

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