बंदियों की कलाकृतियों और जैविक सब्जियों ने जीता लोगों का दिल
गोरखपुर – गोरखपुर महोत्सव के भव्य आयोजन के अवसर पर जिला कारागार गोरखपुर द्वारा लगाए गए विशेष स्टॉल को लोगों का भरपूर समर्थन और सराहना मिल रही है। चंपा देवी पार्क में आयोजित इस महोत्सव में कारागार प्रशासन की यह पहल अपने पांचवें दिन भी चर्चा का विषय बनी रही। स्टॉल पर बंदियों द्वारा तैयार किए गए विश्व प्रसिद्ध टेराकोटा शिल्प,हस्तनिर्मित उत्पादों और पूरी तरह जैविक (ऑर्गेनिक) सब्जियों ने आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
इस स्टॉल का उद्घाटन कारागार के बंदी रक्षक बृजेश कुमार देव, बंदी रक्षक कैलाशनाथ तथा श्रीवासव की देखरेख में किया गया। स्टॉल का मुख्य उद्देश्य बंदियों के हुनर को समाज के सामने लाना उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और मुख्यधारा से जोड़ना है। गोरखपुर महोत्सव जैसे बड़े सांस्कृतिक मंच पर जिला कारागार के बंदियों द्वारा निर्मित उत्पादों का प्रदर्शन न केवल उनके कौशल को सम्मान देता है बल्कि उनके पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है।
स्टॉल पर बंदियों द्वारा निर्मित टेराकोटा शिल्प, मिट्टी से बने सजावटी सामान और कारागार परिसर में बिना किसी रासायनिक उर्वरक के उगाई गई ताजी जैविक सब्जियां—जैसे लौकी, तोरई,टमाटर,मिर्च, भिंडी तथा कंद-मूल फसलें—लोगों को खासा पसंद आ रही हैं। इसके साथ ही कारागार में उत्पादित नीला आलू (कुफरी नीलकंठ) भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
मंडलायुक्त गोरखपुर मंडल द्वारा जिला कारागार गोरखपुर को उत्कृष्टता के लिए पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं दर्जा प्राप्त मंत्री एवं यूपीसीडा अध्यक्ष राघेश्याम सिंह द्वारा बंदी रक्षक कौशलेंद्र चंद्र श्रीवास्तव को स्टॉल की सुंदर साज-सज्जा एवं उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया। यह सम्मान कारागार प्रशासन और बंदियों के लिए प्रेरणास्रोत साबित हुआ है।
प्रभारी जेल अधीक्षक अरुण कुमार कुशवाहा के मार्गदर्शन में संचालित इस पहल का उद्देश्य बंदियों की छिपी रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करना उनके सुधार एवं पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत करना और उन्हें भविष्य के लिए आत्मनिर्भर बनाना है। महोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने स्टॉल पर पहुंचकर उत्पादों की खरीदारी की और बंदियों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
कारागार प्रशासन ने बताया कि जिला कारागार परिसर में रासायनिक उर्वरकों से मुक्त जैविक सब्जियों का नियमित उत्पादन किया जा रहा है। साथ ही ओडीओपी (एक जनपद,एक उत्पाद) योजना के तहत गोरखपुर टेराकोटा शिल्प का प्रशिक्षण भी बंदियों को दिया जा रहा है,जिससे वे रिहाई के बाद अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
जेल प्रशासन का यह प्रयास बंदियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। गोरखपुर महोत्सव में मिल रही प्रशंसा से बंदियों के उत्साह में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

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