कर्मचारियों की है बेहद कमी,सीएमएस काटते हैं केवल चक्कर

 

रायबरेली। जिला अस्पताल में स्टाफ नर्सो की बेइंतहा कमी से चलते मरीज का सही ढंग से इलाज नहीं हो पा रहा है लेकिन मुख्य चिकित्सा अधीक्षक है कि उन्हें इन सब बातों से कोई परवाह नहीं है। उनका साफ कहना है कि जो मेरी शिकायत करेगा वह सुरक्षा गार्ड के माध्यम से कमरे से बाहर होगा। क्योंकि उन्हें अपने खिलाफ या अपने कृत्यों से मरीज को होने वाली समस्याओं के बारे में कुछ सुनना ही नहीं है नतीजा यह है कि एक-एक स्टाफ नर्स लगभग 40 से 50 बेड के मरीजों देखभाल कर रही हैं और इसका नतीजा यह होता है कि मरीजों तक सही समय से दवा या इंजेक्शन तक नहीं पहुंच पाता हैं । तो क्या अस्पताल में भर्ती मरीजों का इलाज के नाम पर केवल साफ सफाई की व्यवस्था ही दिखाई देती है। क्योंकि यदि एक मरीज के पास स्टाफ नर्स 5 मिनट का भी समय सुई दवा पट्टी या हालत देखने के लिए देती हैं तो आप अंदाजा लगा सकते हैं 50 मरीज के तक पहुंचने और उनको इंजेक्शन,दवा देने में कितना लंबा समय लगता होगा और डॉक्टर जिस समय पर इंजेक्शन और दवा देने की बात कहता है वह कर्मियों की कमी के कारण संभव ही नहीं हो पता है और यह कर्मचारियों की कमी होने के कारण बताया जाता है। यही कारण है कि कर्मचारियों को मानसिक उत्पीड़न भी झेलना पड़ता है। लेकिन इन सबको सुनने वाला कोई नहीं है बल्कि यह बताया जाता है कि देखिए कितनी भारी मात्रा में जिला अस्पताल में लोग अपना इलाज करवाने आ रहे हैं। क्योंकि ऑनलाइन पर्चे में संख्या कुछ यही बताती है। लेकिन स्वास्थ विभाग द्वारा कभी भी यह जानने की कोशिश नहीं हुई कि इन पर्चो में से कितने ऐसे मरीज थे जो की इस अस्पताल से इलाज कराकर चुस्त दुरुस्त होकर अपने घर को पहुंच गए। क्योंकि नाम बड़े दर्शन छोटे के सिद्धांत पर लोग जिला अस्पताल में आते तो हैं पर जब यहां पर उन्हें अव्यवस्थाओं की हकीकत पता चलती है तो मजबूरी में निजी चिकित्सालय की ओर चल देते हैं। लेकिन पहली बार जो पर्चा बनता है उसमें उनकी संख्या दर्ज होने के कारण अस्पताल दिखाता है कि वह बहुत बेहतर सुविधा दे रहा है। लेकिन जहां पर कर्मचारियों की ही कमी हो वहां पर सुविधा कैसे मिल सकती है ? यह तो सोचने वाली बात है आगे हम यह भी बताएंगे कि कैसे अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों को पिछले दो माह से वेतन नहीं दिया गया और उन्हीं के बल पर अस्पताल के हुक्मरान अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। क्योंकि इन सब का कारण सिर्फ एक समझ में आता है की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को अस्पताल में अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की समस्याओं के बारे में कुछ पता ही नहीं है। उन्हें पता है तो सिर्फ यह की कोई भी उनके पास शिकायत दर्ज करवाये
तो उसे बेइज्जत करके बाहर करवा दिया जाए। जिससे कि दोबारा वह शिकायत दर्ज न करवा सके और यह भी ना हो सके तो उसके मरीज को ही एम्स या लखनऊ डॉक्टर से कहकर भिजवा दिया जाए। जिससे कि सारा बवाल ही खत्म हो जाए तो इस तरह चल रही है रायबरेली जिला चिकित्सालय की बेहतर स्वास्थ्य सेवा।

4
3
1
5
6
7
2

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *