एक ही जिला अस्पताल, एक ही मरीज,एक ही खून एक ही दिन, जांच अलग अलग,

 

 

 

 

 

रायबरेली। राना बेनी माधव सिंह जिला चिकित्सालय में यदि आप इलाज करवा रहे हैं तो हो जाइए सावधान। क्योंकि वहां पर इलाज के नाम पर आपको श्मशान की ओर भेजने की व्यवस्था की जा रही है। जी हां इससे पहले भी न्यूज़ टीम लगातार इस बात को उजागर करता चला आ रहा है कि जिला चिकित्सालय में इन दिनों स्वास्थ्य सुविधाएं धरातल पर चल रही है। कभी वीवीआईपी अस्पताल में गिने जाने वाला राणा बेनी माधव सिंह जिला चिकित्सालय बाहर से भले ही चमकता धमकता नजर आता हो। लेकिन भीतर से उसमें उतनी ही गंदगी दिखाई देती है। अस्पताल में जहां मरीज को हर सुविधा के लिए कर्मचारियों को सुविधा शुल्क देना पड़ता है और कर्मचारी भी बड़ी ईमानदारी से अपना सुविधा शुल्क मांगते हैं कि हमने आपकी सबसे ज्यादा सेवा की है तो हमें भी तो कुछ मिलना चाहिए। क्योंकि इन कर्मियों को भी पता है कि यहां पर डॉक्टर और उनके साथ चलने वाली टीम मरीजों से किस तरह से इलाज और जांच के नाम पर लूट करती है यहां तक की मरीज के छुट्टी के कागज तक देने में मरीजों का दोहन किया जाता है और यह बताया जाता है कि आप परेशान ना होंगे हम आपको अपने पास से भी दवा देंगे जो डॉक्टर ने लिखी है । इस तरह गरीब मरीजों को लूटा जा रहा है। यह तो जिला अस्पताल के भीतर की आम बात है लेकिन किस तरह मौत का नाच किया जा रहा है। उसे देखकर आप खुद इन जमीन के भगवान और अस्पताल में होने वाले इलाज पर सोचने को मजबूर हो जायेगे। न्यूज टीम के पास एक मरीज की ब्लड रिपोर्ट मिली है। जिसमें उसकी अलग-अलग दो जांच रिपोर्ट बनी है एक ही दिन की लेकिन एक ही मरीज के एक ही खून की एक ही अस्पताल में जांच रिपोर्ट अलग अलग है और अलग-अलग रिपोर्ट बनाकर मरीज की फाइल में लगा दिया गया था और उसमें एक रिपोर्ट को डॉक्टर ने सही मानकर भर्ती मरीज को ठीक-ठाक बात कर उसे घर भी भेज दिया। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जहां एक रिपोर्ट में 9 पॉइंट हीमोग्लोबिन बताया है वहीं दूसरी रिपोर्ट में 11 पॉइंट हीमोग्लोबिन बताकर दिया गया। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं की जांच के नाम पर किस तरह मौत का खेल जिला अस्पताल में खेला जाता है और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक है कि वह कहते हैं हम अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दे रहे हैं और हर तरफ से कोशिश कर रहे हैं कि यहां की शिकायतें कहीं बाहर उजागर न होने पाए और मरीज है कि उन्हें यह मजबूरी रहती है कि अस्पताल में गरीबों के चलते आए हैं तो चुपचाप जैसे तैसे इलाज करवा ले अगर मरीज बच गया तो उनकी किस्मत और मर गया तो भगवान को दोषी मानकर चल देते हैं। जबकि घनघोर लापरवाही के चलते मरीजों को यह जमीन के भगवान कहे जाने वाले लोग श्मशान का रास्ता दिखा रहे। और मजेदार बात यह है कि आप इन जमीन के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर और उनके यमदूतों का नाम पता भी नहीं जान सकते । क्योंकि अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में जो उपस्थित तालिका लगी हुई है उसमें भी डॉक्टर के और कर्मचारियों के नाम तक गलत दर्ज हैं। इससे पहले भी न्यूज़ टीम ने इस बात को उजागर किया था तब कुछ दिनों तक मामला ठीक-ठाक रहा। लेकिन आज जब फिर न्यूज टीम वहां पहुंची तो आज की ही डेट में गलत डॉक्टर का नाम वहां पर दर्ज दिखा। टीम ने जैसे ही इस मामले को अपने कमरे में कैद किया वैसे ही जिला अस्पताल कर्मचारी सक्रिय हो गए और तत्काल उसमें साफ सफाई करवा दी गई। तो कुछ इस तरह से मुख्य चिकित्सा अधीक्षक रायबरेली के लोगों को जिला अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था दे रहे हैं जहां पर जान का जोखिम हर वक्त बना रहता है और जान कौन ले लेगा इसका भी पता नहीं चलता।

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