लिपुलेख विवाद: नेपाली कांग्रेस ने भारत-चीन समझौते पर जताई कड़ी आपत्ति

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
06/05/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – भारत और चीन के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा को नेपाली भूमि लिपुलेक के रास्ते संचालित करने के समझौते पर मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने गंभीर आपत्ति जताई है।

पार्टी की केंद्रीय प्रदर्शन समिति की आज हुई बैठक में निष्कर्ष निकला कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच हुए समझौते से नेपाल की संप्रभुता और भौगोलिक अखंडता पर सवाल खड़ा हो गया है।

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए नेपाली कांग्रेस के संयुक्त मंत्री उदय शमशेर जबरा ने स्पष्ट किया कि लिपुलेक, लिंपियाधुरा और कालापानी निर्विवाद रूप से नेपाली भूमि हैं।

उन्होंने कहा, “नेपाली कांग्रेस ने भारत और चीन के बीच नेपाली भूमि लिपुलेक के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित करने के समझौते पर गंभीरता से ध्यान आकर्षित किया है।

इस पर हमारी स्पष्ट राय है, इसलिए हमने सरकार द्वारा भेजे गए राजनयिक नोट को सकारात्मक रूप से लिया है।”

नेपाल सरकार ने हाल ही में इस मुद्दे पर भारत और चीन दोनों को एक राजनयिक नोट भेजा था, जिसमें उनसे नेपाली भूमि का सम्मान करने को कहा गया था।

कांग्रेस ने सरकार के इस कदम को राष्ट्रीय स्वतंत्रता की रक्षा के लिए आवश्यक और सही कदम बताते हुए इसका पूरा समर्थन किया है।

कांग्रेस का यह रुख है कि नेपाल के नए मानचित्र में शामिल सामरिक महत्व के इस त्रिपक्षीय बिंदु पर पड़ोसी देशों द्वारा की जाने वाली किसी भी गतिविधि को नेपाल की अनुमति और भागीदारी के बिना वैधता नहीं मिलेगी।

इस घटना ने भविष्य में नेपाल की विदेश नीति और अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों में और अधिक राजनयिक गतिविधि की आवश्यकता को दर्शाया है।

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