नेपाल को नजरअंदाज कर लिपुलेख के रास्ते मानसरोवर यात्रा शुरू करने की तैयारी में भारत-चीन- फिर भड़का कूटनीतिक तनाव!

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
14/05/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – भारत और चीन द्वारा सीमा विवाद समाधान के लिए स्थापित द्विपक्षीय तंत्र को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए, नेपाली भूमि लिपुलेक के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से संचालित करने की तैयारी के बाद नेपाल-भारत-चीन संबंध फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं।

हालांकि भारत और चीन के बीच कोविड-19 के बाद बंद हुई मानसरोवर यात्रा को अगले जून से अगस्त तक फिर से शुरू करने पर सहमति बनी है, लेकिन पता चला है कि नेपाल को इसकी कोई औपचारिक जानकारी नहीं दी गई है।

नेपाल ने एक राजनयिक नोट के जरिये इस पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे अपनी संप्रभुता के प्रति गंभीर उपेक्षा बताया।

नेपाल लंबे समय से लिम्पियाधुरा, लिपुलेक और कालापानी इलाकों पर अपना दावा करता रहा है।

लेकिन 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक अपना रुख दोहराने के बावजूद भारत और चीन दोनों नेपाल की आपत्तियों को लगातार नजरअंदाज करते नजर आ रहे हैं।

2020 में नेपाल ने चुक्चे नक्शा जारी कर विवाद को नए मुकाम पर पहुंचा दिया था और भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

उसके बाद हालांकि उच्च स्तरीय बातचीत और तंत्र के जरिए समाधान निकालने की बात कही गई थी, लेकिन 12 साल से विदेश सचिव स्तर के तंत्र की बैठक नहीं होने से समस्या और जटिल होती जा रही है।

इस बीच, आने वाले हफ्तों में काठमाण्डौ-दिल्ली उच्च स्तरीय राजनयिक यात्रा निर्धारित होने के साथ, यह मुद्दा फिर से निर्णायक राजनीतिक बहस के केंद्र में होने की संभावना है।

पूर्व राजदूतों और राजनयिक विशेषज्ञों ने इस विवाद को “ऐतिहासिक लेकिन तेजी से जटिल सीमा मुद्दा” कहा है, जिसके लिए नई और रचनात्मक राजनयिक पहल की आवश्यकता है।

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