ईरान से युद्ध में अमेरिकी सेना को बड़ा झटका: 49 उन्नत लड़ाकू विमान नष्ट होने की खबर

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
14/05/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे पर हैं, वहीं अमेरिकी राजनीति में एक सनसनीखेज खुलासे से दुनिया भर में हलचल मच गई है।

संयुक्त राज्य अमेरिका की विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने घोषणा की है कि ईरान के साथ नवीनतम सैन्य मुठभेड़ में अमेरिकी वायु सेना को उम्मीद से कहीं अधिक नुकसान हुआ है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ईरान के मिसाइल हमले में 39 अमेरिकी लड़ाकू विमान पूरी तरह से नष्ट हो गए, जबकि 10 अन्य विमान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए।

नष्ट हुए विमानों में F-35 और E3 जैसे महंगे फाइटर जेट भी शामिल हैं, जो दुनिया में सबसे उन्नत माने जाते हैं।

हालाँकि अमेरिकी सरकार ने अब तक इस तथ्य को गुप्त रखा है, लेकिन विपक्ष द्वारा मरम्मत लागत और सैन्य क्षति का सही विवरण सामने लाने के बाद ट्रम्प प्रशासन दबाव में आ गया है।

एयरक्राफ्ट कैरियर (विमान वाहक) पर तैनात जेट्स को हुए इस नुकसान ने अमेरिकी सैन्य श्रेष्ठता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ये खुलासे उस सैन्य सफलता की पुष्टि के लिए आधार प्रदान करते हैं जिसका दावा ईरान करता रहा है।

ईरान ने पहले कहा था कि उसके हमलों में सैकड़ों अमेरिकी सैनिक मारे गए और दर्जनों विमान नष्ट हो गए, जबकि अमेरिका ने केवल प्रचार के तौर पर उन पर गोलीबारी की थी।

लेकिन अब अमेरिकी कांग्रेस में 49 विमानों के खोने और अरबों डॉलर के नुकसान का मुद्दा उठाया गया है, जो इस बात का संकेत है कि मध्य पूर्व में अमेरिका की पकड़ कमजोर हो रही है।

यह भी खबर है कि विमानवाहक पोतों को हुए नुकसान के कारण कई अमेरिकी सैनिक घायल हो गए हैं और उनका गुप्त रूप से इलाज किया जा रहा है।

लंबे समय से अमेरिकी कमांड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सैनिकों को अपने परिवारों से संपर्क करने की अनुमति नहीं दी है और यहां तक ​​कि इंटरनेट सेवा पर भी प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे अमेरिकी लोगों में गुस्सा है।

इस घटना का विश्लेषण ईरान युद्ध में अमेरिका को मिली सबसे बड़ी और शर्मनाक हार के रूप में किया गया है।

इस बीच, अपनी चीन यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए चीनी सहायता मांग सकते हैं।

ट्रंप यात्रा से पहले ईरान के साथ समझौता करके अपनी जीत का ऐलान करना चाहते थे, लेकिन ईरान के आत्मसमर्पण करने से इनकार करने के बाद वह खाली हाथ चीन पहुंचे।

चीन का यह रुख रहा है कि युद्धविराम केवल ईरान की शर्तों पर होना चाहिए, जिससे अमेरिका की विश्व शक्ति (महाशक्ति) के रूप में स्थिति को और धक्का लगा है।

सऊदी अरब और कतर सहित खाड़ी देश अब ईरान के साथ शत्रुता बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलकर व्यापार सुविधा चाहते हैं।

इस तरह एक तरफ अपने ही देश के भीतर सैन्य नुकसान का खुलासा और दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ने से अमेरिका के लिए आने वाले दिन काफी मुश्किल नजर आ रहे हैं।

यदि यह युद्ध ऐसे ही चलता रहा तो इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और विश्व राजनीति को अपूरणीय क्षति होना निश्चित है।

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