अमेरिका-रूस की छाया से निकलकर भूमध्य सागर में घुसा भारत, तुर्की-पाकिस्तान इस्लामिक नाटो का सीधा संदेश

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
29/05/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – भारत ने भूमध्य सागर में बड़ा कदम उठाया है।

अक्सर अमेरिका या अपने पारंपरिक मित्र रूस की छाया से बाहर, भारत ने खुद को भूमध्य सागर के एक छोटे से देश साइप्रस की ओर रखा है।

हाल ही में साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडोलाइड्स नई दिल्ली के दौरे पर थे।

अब उनके जाने के बाद भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी यूरोपियन यूनियन फोरम जिमनिच में हिस्सा लेने के लिए साइप्रस पहुंचे हैं।

साइप्रस में भारत के रणनीतिक कदमों से पाकिस्तान और तुर्की के सहयोगी इस्लामिक नाटो की टेंशन बढ़ना तय है।

तुर्की मीडिया को यह भी आशंका है कि साइप्रस भारत से ब्रह्मोस और आकाश जैसी मिसाइलें खरीद सकता है, जिन्हें पहली बार भूमध्य सागर में तैनात किया जा सकता है।

दरअसल, जब साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडोलाइड्स ने नई दिल्ली का दौरा किया, तो भारत और साइप्रस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को पूर्ण रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ा दिया है।

पांच साल का रक्षा रोडमैप और कई समझौते पूर्वी भूमध्य सागर में सुरक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच बढ़ते तालमेल का संकेत देते हैं।

इसे तब बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के सुन्नी गठबंधन के साथ इस्लामिक नाटो मध्य पूर्व में विकास कर रहा है।

भारत ने तुर्की के दुश्मन साइप्रस के साथ यह रक्षा सौदा करके इस्लामिक नाटो को अपना संदेश दिया है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर जिमनिच में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए साइप्रस पहुंचे हैं।

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