आखिर किसके आदेश पर आज भी सीवर टैंक में उतरते हैं नगर पालिका के कर्मी

 

रायबरेली। नगर पालिका परिषद में लगातार यह शिकायत रहती है कि किसी भी कर्मचारी को सीवर टैंक में नीचे ना उतर जाए। लेकिन पता नहीं किसका आदेश जारी होता है कि कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर सीवर टैंक में उतरकर अपना काम करने लगते हैं । मजेदार बात यह है कि इस दौरान नगर पालिका परिषद के तमाम कर्मचारी और खुद उनके हवलदार, ठेकेदार मौके पर खड़े रहते हैं । लेकिन इन कर्मचारियों को किसके आदेश पर सीवर टैंक के नीचे उतर जाते हैं यह बताने वाला कोई भी नहीं दिखता है। बल्कि उल्टा ही फोटो या कैमरा चलाने वालों को समझाया जाता है कि इस पर किसी भी प्रकार की कोई भी टीका टिप्पणी न की जाए । लेकिन वह यह भूल जाते हैं कि एक जरा सी लापरवाही से उसकी व्यक्ति की मौत हो सकती है और उसका परिवार सड़कों पर आ सकता है। क्योंकि शहर में ही तमाम घटनाएं देखने को मिली है जहां सीवर में उतरते ही सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई । एक मामले में तो सफाई कर्मचारियों की मौत होने के बाद नगर पालिका परिषद अधिकारियों ने कर्मचारियों ने यह आश्वासन दिया था कि मृतक कर्मचारियों के परिवार को सभी कर्मचारी अपना एक दिन का वेतन देंगे। लेकिन अधिकारियों के इस आदेश के 1 घंटे बाद ही कर्मचारियों ने किसी भी प्रकार का वेतन देने से इनकार कर दिया। उनका साफ कहना था कि नगर पालिका परिषद के कर्मचारियों की मौत पर नगर पालिका परिषद अपनी तरफ से अनुदान क्यों नहीं देती है। इस पर कोई विचार नहीं हो रहा लेकिन कर्मचारियों के साथ दुर्घटना होने पर कर्मचारियों से ही पैसा मांगा जा रहा। क्योंकि उनके साथी कर्मचारियों की मौत हो गई है तो क्या इन कर्मचारियों की मौत इतनी आसान है या फिर इन कर्मचारियों को कोई झूठा आश्वासन देकर मैदान में उतार दिया जाता है। मजेदार बात यह है कि 42 बैकलाग कर्मचारी आज भी सफाई कर्मचारी के तौर पर काम करने से अपने आपको दूर रखे हुए हैं और विभाग भी इन कर्मचारियों को मैदान पर नहीं उतर पा रहा है। जबकि खुद इन कर्मचारियों को नगर पालिका परिषद के शासनादेश के अनुसार मूल पद पर काम करने का आदेश है। लेकिन सालों से ये कर्मी अपने मूल पद पर काम नहीं कर रहे हैं । बल्कि उन कर्मचारियों से काम करवा रहे हैं जो की मामूली तौर पर ठेकेदारी या आउटसोर्सिंग के तौर पर अपना जीवन यापन कर रहे हैं । मजेदार बात यह है कि बैकलाग कर्मचारी 46 हजार रुपए लगभग तनख्वाह पाते हैं और इतनी ही वेतन नियमित कर्मचारी पाते हैं । परंतु सीवर टैंक में उतारने के लिए आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को लाया जाता है । जिनकी तनख्वाह मात्र 9 से 10 हजार रुपए के बीच में होती है । यानी की जान जोखिम उन कर्मचारियों के सर पर डाली जाती है जिनकी कमाई मात्र कुछ हजार रुपए है। आप अंदाजा लगा सकते हैं जब कुछ हजार रुपए के लिए कर्मी विभाग की 8 घंटे ड्यूटी बजाता हो। तो वह अपने अधिकारियों की बात कैसे काट सकता है । क्योंकि उसे भी पता है ठेकेदारी में कभी भी उसे नौकरी से निकाला जा सकता है। लेकिन सीवर टैंक में आखिरकार किसके आदेश पर इन कर्मचारियों को उतारा जाता है यह बताने वाला कोई नहीं है । तो क्या नगर पालिका परिषद मनमानी ढंग से कर्मचारियों से काम कर रही है या फिर नगर पालिका परिषद को अपनी कर्मचारियों की जान जोखिम का कोई डर नहीं है।

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