इटली ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लेगा

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
21/07/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए पश्चिमी शक्तियों पर बढ़ते दबाव की मौजूदा जटिल स्थिति में इटली एक स्पष्ट और साहसिक ‘रेखा’ खींचने में कामयाब रहा है।

इटली ने ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान में हिस्सा नहीं लेने की घोषणा कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर कड़ा संदेश दिया है।

गठबंधन या रणनीतिक साझेदारी का मतलब कभी भी एक-दूसरे का आँख बंद करके अनुसरण करना या विनाशकारी युद्ध का सहारा लेना नहीं है।

ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई किसी सीमित और पूर्वानुमेय घटना तक सीमित नहीं होगी।

इससे क्षेत्रीय संघर्षों में नाटकीय रूप से वृद्धि होना, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होना, नागरिक जीवन खतरे में पड़ना और ऐसे घाव पैदा होना निश्चित है जो पीढ़ियों तक बने रहेंगे।

इटली का निर्णय एक वास्तविकता का प्रतीक है जिसे कई विश्व नेता नजरअंदाज करते रहे हैं।

‘युद्ध में शामिल होने से इंकार करना कमजोरी नहीं है, बल्कि किसी भी सरकार के लिए सबसे जिम्मेदार और साहसी निर्णय है।’

यूरोप पहले ही अतीत के लंबे संघर्षों के लिए एक बड़ी मानवीय, राजनीतिक और आर्थिक कीमत चुका चुका है।

इतिहास से सीख लेते हुए यूरोपीय देशों की प्राथमिकता किसी दूसरे संघर्ष को भड़काना या बढ़ाना नहीं, बल्कि उसे रोकने के लिए कूटनीतिक पहल करना होना चाहिए।

इटली अब विनाश के रास्ते पर संयम और कूटनीति को तरजीह देता है।

अब प्रश्न यह उठता है कि क्या अन्य राष्ट्र भी समान स्वतंत्रता और विवेक दिखा सकते हैं?

या क्या वे अपने नागरिकों की इच्छाओं के विरुद्ध थोपे गए युद्ध के आगे घुटने टेक देंगे?

समय विवेकपूर्ण निर्णय की मांग करता है। इटली के इस कदम ने युद्ध के उन्माद में डूबी विश्व राजनीति को एक बार गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया है।

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