जाम से जूझ रहा गोरखपुर का ‘विरासत गलियारा’

 

घंटाघर से पांडेयहाता तक जाम का ‘झाम’ बरकरार, पुलिस-प्रशासन बेखबर

 

​गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘विरासत गलियारा’ का काम अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। लगभग ₹555.56 करोड़ की लागत से बन रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत शहर के पुराने और व्यस्त इलाकों की सूरत बदलने का प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही सीएम योगी इस ड्रीम प्रोजेक्ट को शहर की जनता को समर्पित करने वाले हैं।
​हालांकि, इस भव्य प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने के बावजूद शहरवासियों को जाम की विकराल समस्या से राहत मिलती नहीं दिख रही है।

​जाम के लिए कुख्यात रहे हैं शहर के ये पुराने इलाके

​शहर के ऐतिहासिक और पुराने व्यापारिक केंद्र माने जाने वाले इलाके— पाण्डेयहाता, घंटाघर, रेती चौक, नखास चौक, बक्शीपुर, अलीनगर से लेकर धर्मशाला तक का पूरा मार्ग लंबे समय से भीषण ट्रैफिक जाम के लिए जाना जाता रहा है। लोगों को उम्मीद थी कि इस महत्वाकांक्षी सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण परियोजना के पूरा होने के बाद यातायात पूरी तरह सुगम हो जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।

​फुटपाथ पर कब्जा और सड़कों पर पार्किंग बनी मुसीबत

​विरासत गलियारे के तहत बने नए और चौड़े फुटपाथों पर स्थानीय दुकानदारों का कब्जा हो गया है। इसके अलावा, सड़क पर ही बेतरतीब तरीके से दोपहिया और चारपहिया वाहनों की पार्किंग आम बात बन गई है।

​दुकानदारों का अतिक्रमण बना मुसीबत

खासकर घंटाघर रोड से पांडेयहाता तक दुकानदारों का सामान फुटपाथ से लेकर सड़कों तक फैला हुआ है, जिससे राहगीरों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है।

​रविवार शाम का बुरा हाल, जाम से जूझते नज़र आये लोग

रविवार की शाम घंटाघर क्षेत्र में वाहनों का ऐसा रेला उमड़ा कि वहां भीषण जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। घंटों लोग इस ट्रैफिक के ‘झाम’ में फंसे रहे, जिससे महिलाओं, बुजुर्गों और एम्बुलेंस तक को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

​ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन की उदासीनता

​सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर समस्या के बावजूद यातायात पुलिस और स्थानीय घंटाघर व पांडेयहाता चौकी की पुलिस इस अराजकता से पूरी तरह अनजान और बेपरवाह बनी हुई है। सड़क पर खुलेआम हो रही अवैध पार्किंग और अतिक्रमण पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है, जिससे लोगों में रोष व्याप्त है।
​विरासत गलियारा प्रोजेक्ट से जुड़ी मुख्य बातें:
​कुल लागत: यह पूरा प्रोजेक्ट लगभग ₹555.56 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है।
​सड़क की चौड़ाई: व्यापारियों और स्थानीय लोगों की सुविधा को देखते हुए डिजाइन में बदलाव कर सड़क की चौड़ाई को 8 मीटर कर दिया गया है।

​लापरवाही से इस खूबसूरत पहल पर लगा रहा बट्टा

सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित दुकानदारों के उचित समायोजन के लिए घंटाघर स्थित बंधु सिंह पार्क में ₹27.26 करोड़ की लागत से मल्टीलेवल पार्किंग सह कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स (लगभग 90% कार्य पूर्ण) और नॉर्मल परिसर में ₹36.47 करोड़ की लागत से एक अन्य आधुनिक कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स का निर्माण कराया जा रहा है।
​बहरहाल एक तरफ जहां सरकार इस प्रोजेक्ट को शहर के विकास का ‘आदर्श मॉडल’ बनाने में जुटी है, वहीं स्थानीय स्तर पर पुलिस और प्रशासन की लापरवाही इस खूबसूरत पहल पर बट्टा लगा रही है। जनता अब प्रशासनिक सख्ती और अतिक्रमणकारियों पर प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद कर रही है ताकि ‘विरासत गलियारा’ वास्तव में शहर के लिए एक सुखद सौगात बन सके।

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