ईरान का साफ़ संदेश: ‘हम शांति वार्ता को लेकर गंभीर हैं, लेकिन अपने अधिकार नहीं छोड़ेंगे’

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
11/05/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को ‘पूरी तरह से अस्वीकार्य’ बताकर खारिज करने के बाद ईरान ने अपने विचार सार्वजनिक कर दिए हैं।

सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि ईरान बातचीत को लेकर हमेशा गंभीर है।

प्रवक्ता बघाई के मुताबिक, ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और अधिकारों के लिए हमेशा ईमानदारी से काम कर रहा है।

उन्होंने कहा, ”राजनयिक प्रक्रिया के अपने नियम होते हैं और हर देश अपने हितों के आधार पर निर्णय लेता है।”

ईरान ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि वह शांति वार्ता में हिस्सा लेना चाहता है, लेकिन इसके लिए उचित माहौल और तर्क होना चाहिए।

दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका की ईमानदारी पर सवाल उठाया है।

प्रवक्ता बघई ने याद दिलाया कि कैसे अमेरिका 2018 में ‘परमाणु समझौते’ से पीछे हट गया था।

उनके मुताबिक, हालांकि बातचीत जारी है, क्योंकि अमेरिका ने अतीत में सैन्य हमले किए हैं, अब अमेरिका के लिए यह साबित करने का समय है कि वह कूटनीति के प्रति कितना प्रतिबद्ध है।

बातचीत और युद्ध दोनों की तैयारी:

ईरान ने कहा है कि वह बातचीत के लिए तैयार है लेकिन किसी भी स्थिति से निपटने में सक्षम है।

बघई ने सख्त लहजे में कहा, “जरूरत पड़ने पर हम लड़ेंगे और सही समय पर कूटनीति (बातचीत) के हथियार का भी इस्तेमाल करेंगे।”

अब अमेरिका और ईरान के रिश्ते बेहद संवेदनशील दौर में पहुंच गए हैं। एक तरफ ट्रंप ईरान की शर्तें मानने को तैयार नहीं हैं तो दूसरी तरफ ईरान भी अपने रुख से पीछे नहीं हटा है।

कूटनीति दो देशों के बीच विवादों को सुलझाने का सबसे अच्छा तरीका है, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों में आपसी विश्वास और ईमानदारी की आवश्यकता होती है।

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