सिंधु जल संधि पर विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान, कहा- पाकिस्तान पहले आतंकवाद छोड़े

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
04/07/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – सिंधु जल समझौते को लेकर भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने स्पष्ट किया है कि भारत ने पाकिस्तान द्वारा जारी सीमा पार आतंकवाद के विरोध में इस समझौते को फिलहाल निलंबित कर दिया है।

मंत्रालय ने कहा कि इस महीने भारत के पेड़ हमेशा साफ और एक समान रहे हैं।

अगर पाकिस्तान इस समझौते पर बातचीत करना चाहता है तो उसे पहले सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और हमेशा के लिए बंद करना होगा।

पाकिस्तान की धमकियों पर भारत का जवाब

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पानी को लेकर युद्ध की धमकी दी है।
भारत ने इसे अपनी नाकामी छुपाने की कोशिश बताया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि पाकिस्तान के ऐसे बयान उसकी हताशा को दर्शाते हैं।

उन्होंने पीओके में हो रहे अत्याचारों पर भी सवाल उठाए।

भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि 1960 के समझौते पर सद्भावना से हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन पाकिस्तान ने बार-बार इसका उल्लंघन किया है। अब पाकिस्तान को इंसानी जान की कीमत समझनी होगी।

समझौते पर भारत का कदम

सिंधु जल संधि विश्व बैंक की मदद से बनाई गई थी। इसमें पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलज) पर भारत का अधिकार होता है और अधिकांश पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) पर पाकिस्तान का अधिकार होता है।

लेकिन भारत ने हमेशा अपनी सीमाओं के भीतर पानी के उपयोग का अधिकार सुरक्षित रखा है।

पहलगाम हमले के बाद भारत ने इस समझौते को निलंबित कर दिया।

अब सरकार ने साफ कर दिया है कि जब तक आतंकवाद पर रोक नहीं लगेगी, पाकिस्तान को पानी की एक बूंद भी नहीं मिलेगी।

जल संसाधन मंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में पाकिस्तान को सिंधु प्रणाली से पानी नहीं मिलेगा।

पाक पर क्या होगा असर?

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और कृषि इसी पानी पर निर्भर है. लेकिन जब वह आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो भारत चुप नहीं रह सकता। भारत का पेड़ हमेशा साफ है- आतंकवाद ख़त्म हो तभी बात करो।

विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर रहा है. पाकिस्तान को अब अपनी नीति बदलनी होगी।

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