एक द्वीप 2 महाशक्तियाँ और विश्व का भाग्य ताइवान आज पृथ्वी पर सबसे संवेदनशील और खतरनाक रणनीतिक केंद्र क्यों है?एक द्वीप 2 महाशक्तियाँ और विश्व का भाग्य ताइवान आज पृथ्वी पर सबसे संवेदनशील और खतरनाक रणनीतिक केंद्र क्यों है?

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट

काठमाण्डौ,नेपाल – विश्व मानचित्र पर ताइवान एक छोटा सा द्वीप देश है, लेकिन इसका भूराजनीतिक महत्व इतना अधिक है कि यह अमेरिका और चीन जैसी दो महाशक्तियों को किसी भी समय आमने-सामने युद्ध में ला सकता है।

चीन ताइवान को अपना एक विद्रोही प्रांत मानता है और उसने आवश्यकता पड़ने पर बलपूर्वक इसे मुख्य भूमि चीन में मिलाने की कसम खाई है।

दूसरी ओर, ताइवान खुद को एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश मानता है और उसे मजबूत अमेरिकी सैन्य समर्थन प्राप्त है।

यह छोटा सा द्वीप दुनिया का सबसे खतरनाक फ्लैशप्वाइंट क्यों बन गया है?
आइये समझते हैं इसके मुख्य कारण,

1. इतिहास और एक चीन नीति:
1949 में कम्युनिस्टों द्वारा चीनी गृहयुद्ध जीतने के बाद, पराजित कुओमितांग सरकार के नेता ताइवान द्वीप में भाग गए और वहां अपनी सरकार स्थापित की।

तब से चीन में दो सरकारें अस्तित्व में आ गयीं। बीजिंग में कम्युनिस्ट सरकार ताइवान को अपने क्षेत्र का अभिन्न अंग मानती है और दुनिया के अन्य देशों को ताइवान के साथ आधिकारिक राजनयिक संबंध रखने की अनुमति नहीं देती है, जिसे वन चाइना पॉलिसी के रूप में जाना जाता है।

2. सेमीकंडक्टर का वैश्विक केंद्र:
ताइवान सिर्फ एक द्वीप नहीं है, यह आधुनिक तकनीक का दिल है।

दुनिया के स्मार्टफोन, कंप्यूटर, कारों और आधुनिक लड़ाकू विमानों में उपयोग किए जाने वाले 90% से अधिक उन्नत सेमीकंडक्टर चिप्स अकेले ताइवान के टीएसएमसी द्वारा उत्पादित किए जाते हैं।

अगर चीन ताइवान पर कब्ज़ा कर लेता है तो दुनिया की पूरी टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री पर चीन का एकाधिकार हो जाएगा, जो अमेरिका को अस्वीकार्य है।

3. प्रथम द्वीप श्रृंखला और अमेरिकी रणनीति:
प्रशांत क्षेत्र में चीन की सैन्य शक्ति का मुकाबला करने के लिए ताइवान अमेरिका की पहली द्वीप श्रृंखला की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।

यदि ताइवान चीन के हाथ में चला गया, तो चीनी नौसेना सीधे प्रशांत महासागर के केंद्र में होगी, और जापान, फिलीपींस और अमेरिकी सैन्य अड्डे सीधे चीन के निशाने पर होंगे।

4. रणनीतिक मूल्यांकन:
अमेरिकी राष्ट्रपति कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो अमेरिकी सेना ताइवान की रक्षा करेगी।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए ताइवान का एकीकरण उनके कार्यकाल का सबसे बड़ा लक्ष्य है।

यह एक ऐसा विवाद है जिसमें समझौते की गुंजाइश बहुत कम है और दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर अड़े हुए हैं।

एक ओर चीनी राष्ट्रीयता और एक-चीन नीति की प्रतिष्ठा, दूसरी ओर ताइवान के लोकतंत्र और अमेरिका की वैश्विक सर्वोच्चता की लड़ाई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *