ओली के गढ़ में बालेन की गड़गड़ाहट: नेपाल को इतिहास का सबसे युवा प्रधानमंत्री मिल रहा है

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
07/03/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – नेपाल के राजनीतिक इतिहास में एक नया और युगांतकारी अध्याय रचा जा रहा है।

पिछले साल के ‘जनरल जी’ युवा आंदोलन की धूम और गर्मी के साथ उभरी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RASWPA) ने देश के आम चुनावों में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक लहर पैदा की है।

लंबे समय से देश की बागडोर संभालने वाली स्थापित ताकतों को पछाड़कर आरएसवीपी अब देश की सबसे शक्तिशाली राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है।

झापा-5 में बालेन शाह पूर्व प्रधानमंत्री और सीपीएन (यूएमएल) के अपदस्थ अध्यक्ष केपी शर्मा ओली से बुरी तरह हार रहे हैं।

अभी झापा जिला में चुनावों की गिनती हो रही है और ओली लगभग हार चुके हैं।

आरएसवीपी के उदय ने नेपाली राजनीति में एक बड़ी लहर ला दी है।

लंबे समय से कब्जे वाले क्षेत्र में बालेन का नेतृत्व करना महज एक सामान्य राजनीतिक घटना नहीं है, यह नेपाली लोगों, विशेषकर युवा पीढ़ी के ‘पुराने नेतृत्व’ से असंतोष और ‘नए विकल्प’ की प्रबल इच्छा का एक ज्वलंत उदाहरण है।

35 वर्षीय इंजीनियर बालेन शाह के अब देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने की चर्चा ने आम लोगों में एक तरह का उत्साह और नई आशा का संचार किया है।

चुनाव आयोग द्वारा प्रकाशित नवीनतम सर्वेक्षण परिणामों के अनुसार, आरएसवीपी 165 निर्वाचन क्षेत्रों में स्पष्ट बढ़त बनाए हुए है।

अभी तक के आंकड़ों के मुताबिक आरएसवीपी कई सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है और कई अन्य क्षेत्रों में बड़े अंतर से आगे चल रही है।

आरएसवीपी का प्रभुत्व आनुपातिक गणना में भी स्पष्ट था, जहां आरएसवीपी ने कुल गिने गए वोटों में से 57.5% से अधिक वोट हासिल किए।

नेपाली कांग्रेस, सीपीएन (यूएमएल) और अन्य पुरानी पार्टियां इस चुनावी तूफान का सामना नहीं कर पा रही हैं।

वर्षों से सत्ता पर काबिज नेता इस बार जनता की कड़ी आलोचना और चुनाव नतीजों के कारण बचाव की मुद्रा में हैं।

यह परिणाम चुनावी जीत तक सीमित नहीं है; यह जनता द्वारा दिया गया महान ‘जनादेश’ है।

बालेन शाह और आरएसवीपी पर अब देश को सुशासन, विकास और समृद्धि के एक नए युग में ले जाने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है।

भ्रष्टाचार को ख़त्म करना, नीतिगत सुधार और ऐसा प्रदर्शन जिसे लोग सीधे अनुभव कर सकें, अगली सरकार की मुख्य परीक्षा होगी।

नेपाली जनता ने पुरानी पार्टियों के विकल्पों पर विश्वास किया है।

भावी नेतृत्व को इस विश्वास को डिगने न देते हुए पूरी निष्ठा और सक्षम नेतृत्व के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

इतिहास के इस मोड़ पर, नेपाल एक नए और उज्ज्वल भविष्य की आशा कर रहा है।

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