अनाथ बच्चों से मिली पूनम सिंह, बोली समाजसेवी बनने का लोग न करे नाटक

 

रायबरेली सदर क्षेत्र के ग्राम पूरे दुबे लोधवारी गांव पहुंचकर कमला फाउंडेशन अध्यक्ष पूनम सिंह ने एक बार फिर से अनाथ बच्चों का हाल पूछा और उनकी खैरियत पूछी। इस दौरान उन्होंने कहा कि कुछ लोग इन बच्चों की मदद के नाम पर समाजसेवी एवं जनप्रतिनिधि बनने का नाटक कर रहे हैं। बताते चले कि दिवंगत चिंतामणि रैदास की शिवरात्रि के समय नदी में लाश मिली थी। तब भी तत्काल पूनम सिंह मृतक के घर पहुंचकर बच्चों को आर्थिक मदद की थी। इन अनाथ बच्चो में मनु, मांडवी, मनीष और संदीप से आज फिर पूनम सिंह उनके गांव पहुंचकर मुलाकात की। माता-पिता को खो चुके इन मासूमों के आंसू पोंछने की एक छोटी सी कोशिश करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने भी लगभग इसी उम्र में अपने पिता को गोलियों से छलनी हालत में देखा था । इस वजह से बच्चों का दर्द उनसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता। पूनम सिंह ने इन बच्चों के घर के बाहर पसरे अंधेरे को दूर करने के लिए अपनी ओर से स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था भी कराई थी। ताकि इन बच्चों का आंगन और भविष्य दोनों रोशन रहें। उन्होंने कहा कि इन बच्चों को विश्वास दिलाती हूँ कि जीवन की इस कठिन डगर पर वे खुद को अकेला न समझें, मैं हर कदम पर उनके साथ खड़ी हूँ। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें शर्म आती है यह कहते हुए की कुछ लोग समाजसेवी और जनप्रतिनिधि के तौर पर आर्थिक मदद के नाम पर यहां पर आकर हाथ में रूपए पैसे रखते हैं और फोटो खिंचवाते हैं उसके बाद अपने आप को समाज सेवी और गरीबों के रहनुमा बनने का नाटक करते हैं । ऐसी भी तमाम शिकायतें इन बच्चों के सामने आई है जो समाज को भी शर्मसार करती है। उन्होंने कहा कि समाज को एक बार फिर से सोचना पड़ेगा कि गरीबों को एक सामान्य जीवन जीने के लिए क्या मनुष्य या बच्चों को पहले अपने पूरे परिवार को मिटाते हुए देखना पड़ेगा । तब ही जाकर क्या सरकार उनके रहने खाने का इंतजाम कर पाएगी ।

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