सरस्वती शिशु मंदिर में हर्षोल्लास से मनाई गई महात्मा बुद्ध जयंती

गोरखपुर, 29 अप्रैल: स्थानीय विद्यालय सरस्वती शिशु मंदिर 10+2, रेल विहार, राप्ती नगर, गोरखपुर में आज 29 अप्रैल 2026 को महात्मा बुद्ध की जयंती वंदना सभा का आयोजन उल्लासपूर्वक किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन से हुआ। इसके पश्चात सरस्वती वंदना की गई। वंदना के उपरांत विद्यालय के जयंती प्रमुख आचार्य श्री प्रेम सागर जी ने महात्मा बुद्ध की जीवनी पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महात्मा बुद्ध का जीवन मानवता को समर्पित था। सिद्धार्थ ने राजसी वैभव एवं सुख-सुविधाओं का त्याग कर वैराग्य को अपनाया। 6 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद उन्हें बोधगया में ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे ‘बुद्ध’ कहलाए। महात्मा बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण, तीनों ही वैशाख पूर्णिमा को हुए। उनकी शिक्षाएं हमें दया, प्रेम और करुणा के साथ जीवन जीने का संदेश देती हैं। उन्हें ‘एशिया का प्रकाश’ कहा जाता है। आज बौद्ध धर्म केवल भारत में ही नहीं, अपितु पूरे विश्व में मानवता का संदेश प्रसारित कर रहा है।

कार्यक्रम के समापन सत्र में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री विनोद सिंह राठौर ने महात्मा बुद्ध के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महात्मा बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व लुम्बिनी, नेपाल में हुआ था। उनके पिता शुद्धोधन कपिलवस्तु के राजा थे। सांसारिक दुखों को देखकर 29 वर्ष की आयु में उन्होंने गृह त्याग कर दिया और सत्य की खोज में निकल पड़े। बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। वे शांत, संयमी और करुणामय थे। उनकी शिक्षाएं अंधविश्वास से दूर और तर्क पर आधारित थीं।

प्रधानाचार्य जी ने आगे कहा कि जीवन की अंतिम यात्रा में प्रिय शिष्य आनंद के यह पूछने पर भगवान आपके परलोक गमन के बाद भिक्षु संघ का क्या होगा। बुद्ध ने कहा था, “अप्प दीपो भव” अर्थात अपना दीपक स्वयं बनना हैं। महात्मा बुद्ध का जीवन मानव समाज के लिए प्रेरणा स्रोत है और उनकी शिक्षाएं मार्गदर्शक हैं। उन्होंने बताया कि सच्ची खुशी बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि मन की शांति और संतुलन में है। वर्तमान परिवेश में भी उनका संदेश अत्यंत प्रासंगिक और महत्वपूर्ण है।

इस अवसर पर प्रधानाचार्य जी ने विद्यालय परिवार की ओर से समस्त छात्र-छात्राओं को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में समस्त आचार्य, आचार्या एवं भैया-बहन उपस्थित रहे।

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