एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने विश्व की सबसे कम आयु की अंतर्राष्ट्रीय बाल भागवत कथा वाचिका के रूप में किया सम्मानित

विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हुआ श्वेतिमा माधव प्रिया का नाम, आध्यात्मिक जगत में गोरखपुर को मिली नई पहचान

 

गोरखपुर/बेलीपार। बेलीपार क्षेत्र के ग्राम भस्मा की निवासी एवं अंतर्राष्ट्रीय बाल व्यास श्वेतिमा माधव प्रिया ने अपनी असाधारण आध्यात्मिक प्रतिभा से विश्व स्तर पर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें विश्व की सबसे कम आयु की अंतर्राष्ट्रीय बाल भागवत कथा वाचिका के रूप में आधिकारिक मान्यता प्रदान करते हुए उनका नाम विश्व रिकॉर्ड में दर्ज किया है। संस्था द्वारा जारी प्रमाणपत्र के साथ उन्हें विश्व रिकॉर्ड धारक घोषित किया गया है। इस उपलब्धि से गोरखपुर सहित पूरे प्रदेश में खुशी की लहर है।

 

 

 

एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार श्वेतिमा माधव प्रिया ने मात्र नौ वर्ष की आयु में 36 श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह तथा 100 से अधिक धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में कथा वाचन कर एक विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने अपनी प्रभावशाली वाणी, शास्त्रों के गहन अध्ययन और सरल प्रस्तुति के माध्यम से सनातन संस्कृति, भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, मानवता, नैतिक मूल्यों, विश्व शांति और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना का संदेश देश-विदेश तक पहुँचाया है। इसी उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया।

श्वेतिमा माधव प्रिया सौहार्द शिरोमणि संत डॉ. सौरभ पाण्डेय एवं देहदानी डॉ. रागिनी पाण्डेय की सुपुत्री हैं। उनकी इस उपलब्धि पर संत-महात्माओं, बौद्ध भिक्षुओं, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों एवं विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि श्वेतिमा की यह उपलब्धि न केवल गोरखपुर और उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव का विषय है। सभी ने विश्वास व्यक्त किया कि वह भविष्य में भी आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक समरसता और मानवीय मूल्यों का संदेश विश्वभर में प्रसारित करती रहेंगी।

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