मुख्यमंत्री पोर्टल पर तीन बार शिकायत,फिर भी नहीं दर्ज हुई गर्भवती मुस्लिम महिला की शिकायत,

 

आखिर कब मिलेगा राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र की गर्भवती मुस्लिम महिला को न्याय

रायबरेली ।विकास की किताबों पर अपने हस्ताक्षर करने वाले हाथ अगर अपराधों पर भी अपना ध्यान दे तो शायद लोगो को विकास की कमी कम ही लगे। अपराधिक मामलों में सबसे ज्यादा उन पीड़ित या पीड़िताओं की होती है जो एक साइलेंट अपराध का शिकार बनते है या बनती है।क्योंकि उसमें ऐसा लचर रवैया अपनाया जाता है जिसकी सुनवाई तक सारा मामला ही दम तोड़ देता है जबकि एक इंसान की पूरी जिंदगी मौत बन जाती है। कुछ ऐसा ही कांग्रेस के घर और राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। एक मुस्लिम गर्भवती महिला न्याय के लिए भटक रही है तो कब मिलेगा उसे न्याय । क्योंकि अब बात केवल उसकी अस्मत की नहीं बल्कि उसके पेट में पल रहे लगभग सात माह के गर्भ के भविष्य की भी है । जिसको जमीन पर आने से पहले ही अपने साथ के न्याय को झेलना पड़ रहा है । मुस्लिम महिला ने न्याय के लिए तीन बार मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद एक बार फिर उसने रायबरेली शहर कोतवाली और रायबरेली पुलिस अधीक्षक के शिकायत दर्ज करवाई है कि रायबरेली के डलमऊ थाने के बड़ेरवा गांव निवासी दीनू सिंह ने शादीशुदा होते हुए भी उसकी मजबूरियों का फायदा उठाते हुए उसे अपने प्रेम के जाल में फसाया और फिर जब उसे पता चला कि दीनू सिंह शादीशुदा है तो उसने इसकी शिकायत डलमऊ थाने में दर्ज करवाई । जिस पर दीनू सिंह ने अन्य लोगों के सामने लिखित गवाह सहित सुलहनामा दिया कि दीनू सिंह मुस्लिम महिला को पत्नी के तौर पर रखेंगे और दोनों पति-पत्नी के धर्म का पालन करेंगे। इसके बाद दोनों लोग पति-पत्नी की तरह आगरा जिले में जाकर रहने लगे और वहीं पर वह गर्भवती भी हो गई है ।लेकिन दिसम्बर 2025 माह में दीनू सिंह भाई रीतू सिंह ने फोन किया और घर पर आयोजन का कार्यक्रम होने की बात भी कही जिस पर दीनू सिंह को महिला ने आगरा से रायबरेली जिले में भेज दिया और यहीं से कहानी ही मुस्लिम महिला की पलट गई।आगरा से निकले दीनू सिंह रायबरेली में लापता हो गए। मामले की जानकारी करते हुए महिला ने तत्काल रायबरेली आगरा पुलिस अधिकारियों और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवा कर अपने लापता पति के खोजबीन और जान माल की सुरक्षा की बात कही । पुलिस इस मामले की जांच कर ही रही थी कि दीनू सिंह और उसके भाई रीतू सिंह रमाशंकर सिंह और अन्य लोग एसटीएफ और सीबीआई के कर्मचारी बनकर आगरा स्थित उसके घर और व्यावसायिक स्थल सारा सामान उठाकर वहां से भी निकल लिए। क्योंकि दीनू सिंह साथ में थे और सभी पति पत्नी और उनका ही समान समझ कर किसी ने कोई विरोध भी नहीं किया बल्कि खुद इन्हीं लोगों ने अपना परिचय इन विभाग के कर्मचारी के रूप में दिया। इस मामले की जानकारी आगरा में काम करने वाली घर की नौकरानी ने दी। तब जाकर पता चला कि पूरे मामले में उसे शुरू से ही धोखा दिया जा रहा है। प्यार में धोखा देकर शारीरिक संबंध बनाने के अपराध से बचने के लिए साजिश वश दीनू सिंह और उसके परिवार वालो ने यह नाटक खेला और अब असली रंग दिखा रहे है। क्योंकि पुलिस ने उसे फोन करके बताया कि उसका लापता पति अपने घर पर अपनी पत्नी के साथ है और उसके साथ रहने को मना कर दिया है। गर्भवती महिला अपने पेट में पल रहे बच्चे को लेकर लगातार शिकायत दर्ज करवा रही है । इसके बाद भी किसी भी तरह का न्याय न मिल पाने के कारण भटक रही है लेकिन शायद भाजपा की सरकार में मुस्लिम महिलाओं के इस दर्द को सुनने वाला कोई नहीं है। लेकिन उसने एक बार फिर से रायबरेली पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है कि उसे इंसाफ दिलाया जाए क्योंकि बात केवल उसके भविष्य की नहीं है बल्कि पेट में जो पल रहा है उसके भी आने वाले समय के न्याय के लिए है।

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