सरस्वती शिशु मंदिर रेलविहार में ‘संस्कृति ज्ञान, विज्ञान, वैदिक गणित, मूर्तिकला एवं लोकनृत्य प्रतियोगिता’ का भव्य आयोजन: मेधा, कला और संस्कृति के त्रिवेणी संगम से गुंजायमान हुआ परिसर

 

 

“भारतीय संस्कृति, विज्ञान, कला और वैदिक गणित हमारे प्राचीन गौरव और आधुनिक प्रगति का सशक्त सेतु हैं; इनसे विद्यार्थियों में तार्किक क्षमता, सर्जनात्मकता और संस्कार दोनों का विकास होता है” — डॉ. धर्मेंद्र कुमार (प्रधानाचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज)

गोरखपुर, जनपद में आज दिनाँक 16 / 10 /26 को रेलविहार राप्तीनगर में सरस्वती शिशु मंदिर (10+2) के प्रांगण में आज विद्या भारती द्वारा आयोजित ‘संस्कृति ज्ञान, विज्ञान, वैदिक गणित, मूर्तिकला एवं लोकनृत्य प्रतियोगिता’ का अत्यंत भव्य, गरिमामयी और उत्साहपूर्ण वातावरण में शुभारंभ हुआ। इस बहुआयामी प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं में अपनी सनातन संस्कृति, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, वैदिक गणित की तीव्र गणनात्मक पद्धतियों के साथ-साथ मूर्तिकला की रचनात्मकता और लोकनृत्य की समृद्ध परंपरा के प्रति रुचि जागृत करना रहा।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ पारंपरिक शंखनाद, माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा संगीताचार्य अभिषेक उपाध्याय के कुशल निर्देशन में प्रस्तुत ‘वक्रतुंड महाकाय…’की सुमधुर संस्कृत वंदना के साथ हुआ।

संपूर्ण कार्यक्रम का अत्यंत ओजस्वी, अनुशासित और आकर्षक संचालन विद्यालय की आचार्या बहन दीपिका मिश्रा द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के आरंभ में विद्यालय के प्रधानाचार्य विनोद सिंह राठौर ने मंचासीन समस्त विशिष्ट अतिथियों का आत्मीय परिचय कराया। इस गरिमामयी अवसर पर प्रमुख अतिथियों का अभिनंदन किया गया:

  • मुख्य अतिथि डॉ. धर्मेंद्र कुमार (प्रधानाचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर) को विद्यालय के कोषाध्यक्ष अजय पाण्डेय द्वारा अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
  • मुख्य अतिथि प्रोफेसर अखिलेश श्रीवास्तव को गोरक्षप्रांत के छात्रावास निदेशक डॉ. राजेश श्रीवास्तव द्वारा अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
  • मुख्य अतिथि विनय कुमार सिंह का सम्मान सरस्वती शिशु मंदिर, पक्कीबाग के प्रधानाचार्य डॉ. राजेश सिंह द्वारा अंगवस्त्र प्रदान कर किया गया।
  • इसके अतिरिक्त, मुख्य अतिथि धीरज कुमार का सम्मान गोरक्षप्रांत के निदेशक डॉ. राजेश श्रीवास्तव द्वारा तथा विशिष्ट अतिथि बहन सृष्टि जी का सम्मान उप-प्रधानाचार्या रुक्मिणी उपाध्याय द्वारा किया गया।

कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए विद्यालय की उप-प्रधानाचार्या रुक्मिणी उपाध्याय ने बताया कि इस त्रि-आयामी व कलापरक प्रतियोगिताओं (विज्ञान, गणित, संस्कृति ज्ञान, मूर्तिकला एवं लोकनृत्य) का मुख्य उद्देश्य बच्चों की बौद्धिक, तार्किक एवं कलात्मक क्षमताओं को तराशना है।

अतिथियों द्वारा मंच से औपचारिक उद्घोषणा के उपरांत, उप-प्रधानाचार्या ने निर्णायक मंडल के सदस्यों को उनकी निर्धारित प्रतियोगिताओं के नियमों और विस्तृत विवरण से अवगत कराया। इसके पश्चात, विज्ञान प्रदर्शनी, गणित प्रश्नमंच, संस्कृति ज्ञान परीक्षा के साथ-साथ छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत मनमोहक मूर्तिकला कलाकृतियों और जीवंत लोकनृत्य प्रस्तुतियों का अवलोकन अत्यंत पारदर्शिता, निष्पक्षता और अनुशासन के साथ संपन्न कराया गया।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने कहा, “विज्ञान, गणित और हमारी लोक कलाएँ एक-दूसरे की पूरक हैं। मूर्तिकला और लोकनृत्य हमारी प्राचीन सभ्यता के जीवंत दस्तावेज हैं, जबकि विज्ञान और वैदिक गणित हमारे भविष्य को दिशा देते हैं।”

संकुल प्रमुख एवं पक्कीबाग शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य डॉ. राजेश सिंह ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि शिशु मंदिरों का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्र-छात्राओं को सर्वांगीण रूप से सक्षम, संस्कारवान और लोक-संस्कृति से जुड़ा हुआ राष्ट्रभक्त बनाना है।

समारोह के समापन सत्र को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य विनोद सिंह राठौर ने सभी विजेता प्रतिभागियों, उनके संरक्षकों और निर्णायक मंडल के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “प्रतियोगिता में हार-जीत से अधिक महत्वपूर्ण सहभागिता और उससे मिलने वाला अनुभव होता है। हमारे भैया-बहन अपनी विज्ञान-मेधा, कला और संस्कारों के बल पर भविष्य में राष्ट्र का नाम वैश्विक पटल पर रोशन करेंगे।”

कार्यक्रम के अंतिम चरण में विज्ञान, गणित, संस्कृति ज्ञान, मूर्तिकला एवं लोकनृत्य प्रतियोगिताओं के विभिन्न वर्गों में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाले विजयी छात्र-छात्राओं को अतिथियों के कर-कमलों द्वारा मेडल, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

कल्याण मंत्र के सस्वर पाठ और शांति पाठ के साथ इस ज्ञान, विज्ञान और कला के महापर्व का सफलतापूर्वक समापन हुआ

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