विश्वास और आत्मविश्वास: कितने सही, कितने गलत?

 

विनय तिवारी की कलम से

मनुष्य का जीवन विश्वास और आत्मविश्वास के सहारे ही आगे बढ़ता है। विश्वास हमें दूसरों से जोड़ता है, जबकि आत्मविश्वास हमें स्वयं की क्षमताओं पर भरोसा करना सिखाता है। लेकिन जब इन दोनों का संतुलन बिगड़ जाता है, तब यही गुण कई बार कमजोरी और भ्रम का कारण भी बन जाते हैं। इसलिए यह समझना आवश्यक है कि विश्वास और आत्मविश्वास कितने सही हैं और कब गलत साबित हो सकते हैं।
विश्वास समाज और रिश्तों की नींव है। परिवार, मित्रता, व्यापार और सामाजिक व्यवस्था सभी आपसी विश्वास पर टिके हैं। यदि लोगों के बीच विश्वास न हो तो सहयोग, प्रेम और सामूहिक विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती। विश्वास व्यक्ति को सुरक्षा और अपनत्व का एहसास कराता है। लेकिन आंख मूंदकर किया गया विश्वास अक्सर धोखे का कारण बन जाता है। इतिहास और वर्तमान दोनों इस बात के गवाह हैं कि अंधविश्वास और बिना परखे गए भरोसे ने अनेक लोगों को नुकसान पहुंचाया है। इसलिए विश्वास जरूरी है, परंतु विवेक के साथ।
इसी प्रकार आत्मविश्वास सफलता की पहली शर्त माना जाता है। जो व्यक्ति अपनी क्षमता पर भरोसा रखता है, वह कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस जुटा लेता है। आत्मविश्वास व्यक्ति को लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। किंतु जब आत्मविश्वास आवश्यकता से अधिक बढ़ जाता है, तो वह अहंकार का रूप ले लेता है। अति आत्मविश्वास व्यक्ति को अपनी कमियों से अनजान बना देता है और कई बार गलत निर्णय लेने के लिए प्रेरित करता है। इसलिए आत्मविश्वास का आधार वास्तविक ज्ञान, अनुभव और तैयारी होना चाहिए।
आज के दौर में सबसे बड़ी चुनौती विश्वास और आत्मविश्वास के बीच सही संतुलन बनाए रखने की है। दूसरों पर इतना विश्वास भी न करें कि स्वयं की सोच खो दें, और स्वयं पर इतना आत्मविश्वास भी न रखें कि दूसरों की सलाह और अनुभव को महत्व देना बंद कर दें। विवेकपूर्ण विश्वास और संतुलित आत्मविश्वास ही व्यक्ति को सही दिशा में आगे बढ़ाते हैं।
अंततः कहा जा सकता है कि विश्वास और आत्मविश्वास दोनों ही जीवन के लिए अनिवार्य हैं। ये तब तक सही हैं, जब तक इनके साथ समझदारी, विनम्रता और यथार्थ का बोध जुड़ा हो। जैसे ही विश्वास अंधा और आत्मविश्वास अहंकारी हो जाता है, वे व्यक्ति को सफलता की बजाय संकट की ओर ले जाने लगते हैं। इसलिए जीवन में विश्वास रखिए, आत्मविश्वास भी रखिए, लेकिन दोनों के साथ विवेक को कभी मत छोड़िए।

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