पर्यावरण संरक्षण संकल्प और पूर्णिमा पर विशेष हवन एवं पूर्ण आहुति का हुआ आयोजन

 

गोरखपुर जनपद के रेलविहार राप्तीनगर के सरस्वती शिशु मंदिर (10+2) के प्रांगण में पर्यावरण की शुद्धि और प्रकृति के संरक्षण हेतु एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना और सनातन परंपराओं के माध्यम से प्रकृति के साथ समन्वय स्थापित करना था। कार्यक्रम के अंतर्गत वैदिक रीति-रिवाज से भव्य हवन-पूजन संपन्न हुआ, जिसमें पूरे विद्यालय परिवार ने पूर्ण आहुति देकर पर्यावरण की रक्षा का सामूहिक संकल्प लिया।

कार्यक्रम के मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए आदरणीय प्रधानाचार्य विनोद सिंह राठौर ने पर्यावरण के गहराते संकट और हमारी भूमिका पर एक अत्यंत गंभीर व विचारोत्तेजक वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि “पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह हमारा स्वयं का एक व्यक्तिगत संकल्प होना चाहिए।” वर्तमान समय में लगातार बढ़ रहे अधिकतम तापमान और भीषण गर्मी की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए उन्होंने आगाह किया कि यदि हम अब भी नहीं संभले, तो आने वाला कल और अधिक संकटपूर्ण होगा। इससे बचने के लिए उन्होंने सभी से पॉलीथिन के प्रयोग से पूरी तरह बचने की अपील की, जो हमारी धरती को बंजर बना रही है।

प्रधानाचार्य ने कार्बन डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों के बढ़ते स्तर को नियंत्रित करने के लिए वृक्षों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केवल पेड़ लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि एक बच्चे की तरह उसकी निरंतर देख-रेख और सुरक्षा करना भी उतना ही आवश्यक है। कुटुम्ब प्रबोधन (पारिवारिक चेतना) के विषय को जोड़ते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संस्कृति में मनुष्य और प्रकृति का समन्वय वैदिक काल से ही अटूट रहा है। हमारे वेदों में प्रकृति को माता का स्थान दिया गया है। अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि एक स्वस्थ शरीर के लिए स्वस्थ पर्यावरण का होना पहली शर्त है। इसलिए, हवन के उपरांत हम सभी सामूहिक रूप से पर्यावरण की शुद्धि और हरियाली बढ़ाने का पवित्र संकल्प लेंगे, ताकि प्रकृति का संतुलन बना रहे।

इसके पश्चात विद्यालय की उप प्रधानाचार्या रुक्मणी ने आचार्यों और विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को शुद्ध रखने का सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक तरीका यज्ञ व हवन है। हवन से निकलने वाला धुआं वातावरण के हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है। उन्होंने बच्चों का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक छात्र को अपने जन्मदिन या किसी भी शुभ अवसर पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और अपने घरों में भी इस संस्कार को आगे बढ़ाना चाहिए।

इस अवसर पर विद्यालय के भैया-बहनों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय देते हुए पर्यावरण संरक्षण पर आधारित एक भव्य प्रदर्शनी लगाई। छात्रों ने सुंदर चार्ट पेपर्स और सजीव चित्रों के माध्यम से ‘ग्लोबल वॉर्मिंग’, ‘जल संरक्षण’, ‘प्लास्टिक मुक्त भारत’ और ‘पेड़ बचाओ-जीवन बचाओ’ जैसे विषयों को बहुत ही प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। चित्रों के माध्यम से भैया-बहनों ने संदेश दिया कि पृथ्वी को विनाश से बचाने का एकमात्र रास्ता प्रकृति की शरण में लौटना ही है।

पूर्णिमा के इस पावन उत्सव पर संपूर्ण विद्यालय परिसर मंत्रोच्चार, वैदिक आहुतियों और पर्यावरण संरक्षण के नारों से गुंजायमान हो उठा। अंत में सभी ने हाथ जोड़कर पर्यावरण शुद्धि का संकल्प लिया और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ। इस अवसर पर समस्त आचार्य आचार्या एवं भैया बहन उपस्थित रहे।

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